भारतीय रिजर्व बैंक देश में कोर महंगाई दर स्थिर रहने के संकेतों के कारण रेपो रेट को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है।
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक देश में कोर महंगाई दर स्थिर रहने के संकेतों के कारण रेपो रेट को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है। यह अनुमान आईसीआईसीआई बैंक ग्लोबल मार्केट्स की हालिया रिपोर्ट में लगाया गया है।
कोर महंगाई स्थिर रहने से मौद्रिक नीति में बढ़ोतरी की संभावनाएं कम
आईसीआईसीआई बैंक ग्लोबल मार्केट्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि कोर महंगाई स्थिर रहने से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति में वृद्धि की संभावनाएं काफी कम हैं। ऐसे में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान आइबीआई रेपो रेट को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है। RBI द्वारा फरवरी 2026 की नीति समीक्षा में मुख्य (कोर) महंगाई दर स्थिर रहने और मजबूत आर्थिक विकास के संकेतों के बीच रेपो दर को 5.25% पर बरकरार रखने की संभावना है। ICICI बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, कोर महंगाई के कम रहने से RBI लंबे समय तक दरों को स्थिर (Prolonged Pause) रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई नियमित रूप से स्थायी तरलता का प्रवाह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि मौद्रिक संचरण बना रहे।
5.25% पर अपरिवर्तित रखा रेपो रेट
आईसीआईसीआई बैंक ने हाल की कोर महंगाई के आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है कि किसी भी महंगाई के अचानक बढ़ने की संभावना भी कम है। हाल में तेल की कीमतों में वृद्धि दर स्थिर रखने के पक्ष में काम कर रही है। फरवरी की शुरुआत में हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के मिनट्स में सदस्यों ने विकास के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया, जो विभिन्न उच्च आवृत्ति संकेतकों और अमेरिका तथा यूरोपीय संघ के साथ हाल की व्यापार संधियों में प्रदर्शित होता है। इस बैठक में एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है।
कोर महंगाई पर फोकस
केंद्रीय बैंक का फोकस इस सयय महंगाई को 4% के लक्ष्य के आसपास स्थिर रखने पर है। इस देखते हुए ही फरवरी 2026 में, RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से बेंचमार्क रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा गया था, जो दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक अभी और कटौती करने के बजाय इंतजार करो और देखो की नीति अपना रहा है। माना जा रहा है कि कोर महंगाई (जो खाद्य और ईंधन को छोड़कर मापी जाती है) के शांत रहने और हेडलाइन मुद्रास्फीति के लक्ष्य के करीब रहने की वजह से दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया गया है।
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