मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मौद्रिक नीति पर चर्चा के लिए कैलेंडर जारी कर दिया है।
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मौद्रिक नीति पर चर्चा के लिए कैलेंडर जारी कर दिया है। हर दो माह के अंतराल पर होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की पहली बैठक 6-8 अप्रैल को होगी।
छह बैठकें होंगी आयोजित
मालूम हो कि देश में रेपो रेट तय करने के लिए रिजर्व बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह-सदस्यीय दर-निर्धारण समिति (मौद्रिक नीति समिति) की अगले वित्त वर्ष में छह बैठकें होगी। आमतौर पर, छह-सदस्यीय समिति बैठक के तीसरे दिन किसी प्रस्ताव पर मतदान करती है और मतदान पूरा होने के बाद RBI गवर्नर निर्णय की घोषणा करते हैं।
जून से फरवरी तक शेड्यूल तय
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठकों का कैलेंडर जारी किया है। दर तय करने वाली समिति की पहली बैठक 6-8 अप्रैल को होगी। आरबीआई द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि दूसरी द्वि-मासिक नीति समीक्षा बैठक 3-5 जून को समाप्त होगी, और इसके बाद अगस्त, अक्टूबर, दिसंबर और फरवरी में तीन-दिवसीय बैठकें होंगी।
क्या होती है मौद्रिक नीति समिति
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) एक छह-सदस्यीय निकाय है, जिसका गठन महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बेंचमार्क नीति दर (रेपो रेट) तय करने का कार्य सौंपा गया है। समिति में आरबीआई के तीन अधिकारी और तीन बाहरी सदस्य शामिल होते हैं। आरबीआई गवर्नर इसके अध्यक्ष होते हैं। MPC मौजूदा घरेलू और आर्थिक स्थितियों पर विचार-विमर्श करने तथा खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखने के बाद द्वि-मासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करती है। समिति ने फरवरी में हुई अपनी पिछली बैठक में अल्पकालिक ऋण दर (रेपो दर) को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था।
रेट कट के बाद अब नजर अप्रैल बैठक पर
आरबीआई ने पिछले साल अपनी ब्याज दरों में 1.25 फीसदी की कटौती की थी। आखिरी बार आरबीआई ने दिसंबर के महीने में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की थी। अब आर्थिक समीक्षकों की नजर इस बात पर रहेगी कि अप्रैल में होने वाली बैठक में आरबीआई ब्याज दरों को होल्ड पर रखता है या फिर बढ़ाता है।
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