प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

शताब्दी वर्ष का समापन

RSS शताब्दी विजयदशमी उत्सव: मोहन भागवत ने संत रविदास और राष्ट्र रक्षा को किया याद

नागपुर में आरएसएस के शताब्दी विजयदशमी उत्सव पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने संत रविदास, स्वामी श्रद्धानन्द और स्वामी लक्ष्मानंद सरस्वती के बलिदान को याद किया।

rss शताब्दी विजयदशमी उत्सव मोहन भागवत ने संत रविदास और राष्ट्र रक्षा को किया याद

RSS Sarsanghchalak Mohan Bhagwat |

नागपुर (महाराष्ट्र)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के समापन और विजयदशमी उत्सव के अवसर पर मंगलवार को नागपुर के रेशिमबाग मैदान में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत ने संत रविदास, स्वामी श्रद्धानन्द और स्वामी लक्ष्मानंद सरस्वती के राष्ट्र और समाज के प्रति योगदान को विशेष रूप से याद किया।

शताब्दी वर्ष और आत्म-जागरूकता का संकल्प

नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संगठन ने पिछले 100 वर्षों में आत्म-जागरूकता जगाने और भारत की एकता व पहचान को मजबूत करने के लिए निरंतर काम किया है।

उन्होंने कहा, "उन्हें याद करना इसलिए भी उचित है क्योंकि संघ पिछले 100 वर्षों से जो काम कर रहा है, उसका मुख्य उद्देश्य इसी आत्म-जागरूकता को जगाना है। इसी आत्म-जागरूकता, पहचान और मूल्यों की नींव पर, संघ भारत को एकजुट और सशक्त बनाने का प्रयास कर रहा है।"

भागवत ने आगे कहा कि पिछले एक साल में शताब्दी वर्ष के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए और आज विजयदशमी के पावन अवसर पर इनके समापन का दिन है।

संत रविदास और महान हस्तियों के बलिदान को नमन

इस वर्ष संत रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के अत्याचारों और भय के माहौल के बीच उन्होंने समाज में आध्यात्मिक भक्ति और समरसता की अलख जगाई।

उन्होंने कहा, "इस कठिन दौर में, संत रविदास जी ने निडर होकर अपने धर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक भक्ति का प्रचार किया। उन्होंने अपने जीवन के उदाहरण से उस दौर के लोगों में आत्मविश्वास और साहस जगाया।"

इसके साथ ही, उन्होंने आर्य समाज के तपस्वी स्वामी श्रद्धानन्द (जिन्हें बलिदान दिए 100 वर्ष पूरे हुए हैं) और ओडिशा के आदिवासियों की सेवा में जीवन समर्पित करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती महाराज के बलिदान को भी नमन किया।

'पंच परिवर्तन' और संविधान का जिक्र

समारोह के दौरान 'पंच परिवर्तन' का हवाला देते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आत्म-जागरूकता और स्वदेशी को अपनाना इसके मुख्य आधार हैं। उन्होंने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का जिक्र करते हुए कहा कि यह आत्म-जागरूकता हमारे संविधान में भी झलकती है, जहां हम खुद को 'हम, भारत के लोग' के रूप में संबोधित करते हैं।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, मुंबई में इज़राइल के महावाणिज्य दूत, 'दैनिक जागरण' के प्रधान संपादक संजय गुप्ता (मुख्य अतिथि), महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि आरएसएस की स्थापना नागपुर में विजयादशमी के दिन 1925 में केशव हेडगेवार ने की थी।
​(इनपुट: ANI)

यह भी पढ़ें: हिमालयी क्षेत्र का एकतरफ़ा विकास तबाही की वजह, नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

Related to this topic: