पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की कीमत में आज भारी उछाल आया है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की कीमत में आज भारी उछाल आया है। इसका असर भारतीय मुद्रा बाजार पर देखने को मिला और भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट के साथ 95 के स्तर को पार कर गया है। 30 अप्रैल को सुबह रुपया 95.02 पर खुला और बाद में टूटकर 95.20-95.32 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।
शेयर बाजार पर भी असर
कच्चे तेल में उछाल और भारतीय रूपये में गिरावट का असर की शेयर कर बाजार पर भी नजर आया है। विदेशी निवेशकों (FII) की शेयर बाजार में भारी बिकवाली और विदेशी फंडों के बाहर जाने से रुपया कमजोर हुआ है। तेल की बढ़ती कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की मजबूती के चलते रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। भारतीय रूपया आज 0.3% की कमजोरी के साथ गिरकर 95.2 प्रति डॉलर पर आ गया, जो 2011-12 के बाद से इसकी सबसे बड़ी गिरावट है। इस गिरावट के बाद रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है। यह 1 जनवरी, 2026 से अब तक अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले 4.1% गिर चुकी है।
मार्च तिमाही में भी गिरावट
मार्च तिमाही में रुपये का मूल्य अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.4% गिर गया है। शुक्रवार के 94.81 प्रति अमेरिकी डॉलर के बंद भाव के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 94.83 प्रति अमेरिकी डॉलर पर बंद हुआ। पिछले सप्ताह रुपये में लगभग 1% की गिरावट आई थी, जो इसी तरह की गिरावट का लगातार चौथा साप्ताहिक आंकड़ा है, और यह डॉलर के मुकाबले 94.84 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था।
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