Delhi : भारत में सेलुलर उपभोक्ता जल्द ही सैटेलाइट (उपग्रह) आधारित मोबाइल सेवा का आनंद ले सकेंगे। अमेरिका के दिग्गज कारोबारी एलन मस्का की कंपनी Starlink ने देश में इसकी लांचिंग की तैयारियां..
Delhi : भारत में सेलुलर उपभोक्ता जल्द ही सैटेलाइट (उपग्रह) आधारित मोबाइल सेवा का आनंद ले सकेंगे। अमेरिका के दिग्गज कारोबारी एलन मस्का की कंपनी Starlink ने देश में इसकी लांचिंग की तैयारियां पूरी कर ली हैं। मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में सब सेवा को एक नई कांति के रूप में देखा जा रहा है। सैटेलाइट आधारित मोबाइल सेवा शुरू होने के बाद सेल फोन उपभोक्ताओं को समुद्र, हवाई जहाज, लिफ्ट या बेसमेंट में भी नेटवर्क नहीं होने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मालूम हो कि अभी सीमित दायरे में स्थापित मोबाइल टावरों से उपभोक्ताओं को सिग्नल मिलते हैं, जिससे वो सेल फोन का उपयोग कर पाते हैं पर एलन मस्क की कंपनी ने इस सेवा के लिए अंतरिक्ष में पृथ्वी से सूर्य कुछ दूरी पर लाखों लोगों ने की संख्या में छोटे सैटेलाइट लांच किये हैं। इन सैटेलाइट के सिग्नल जमीन, समुद्र और पहाड़ सभी जगह समान रूप से मिलते हैं जिससे काल ड्राप की समस्या नहीं होती।
एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरवेट कंपनी Starlink भारत में अपने पूरे पैमाने पर लॉन्च की तैयारी में जुट गई है। रिपोर्ट्स के सुताबिक, कंपनी देशभर में 9 "गेटवे अर्थ स्टेशन" बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रोजेक्ट की शुरुआती योजना में मुंबई, नोएडा, चंडीगढ़, हैदराबाद, कोलकाता और लखनऊ जैसे बड़े शहर शामिल है। माना जा रहा है कि इस कदम से भारत के सुदूर इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच सकेगा वह भी बिना किसी मोबाइल नेटवर्क के।
रिपोर्ट के अनुसार, Starlink में भारत में उपनी Gen 1 सैटेलाइट कॉन्स्टेलेक्शन के जरिए 600 गीगाबाइट प्रति सेकंड की क्षमता के लिए आवेदन किया है। दूरसंचार विश्लल ने फिलहाल कंपनी को डेमो के लिए प्रोविजनल स्पेक्ट्रम अलॉट किया है, ताकि सुरक्षा मानकों की जांच की जा सके। इस अनुमति के तहत Starlink को 100 यूजर टर्मिनल इंपोर्ट करने और केवल फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस के डेमो की इजाजत दी गई है।
सरकार ने सैटेलाइट आधारित मोबाइल सेवा के लिए Starlink पर काफी कठोर शर्तें लवाई हैं ताकि किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोका जा सके। कंपनी ने अपने स्टेशन संचालन के लिए विदेशी तकनीकी विशेषज्ञ लाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि गृह मंत्रालय से सुरक्षा गंजूरी मिलने तक केवल भारतीय नागरिक ही इन स्टेशनों को ऑपरेट कर सकेंगे।
इससे पहले भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों में Starlink टर्मिनलों के गैरकानूनी इस्तेमाल पर चिंता जतायी थी। मार्च 2025 में गृह मंत्रालय ने दूरसंचार विभाग को जांच के निर्देश दिए थे, जब मणिपुर और अंडमान निकोबार द्वीपसमुह में अवैध Starlink उपकरण जब्त किए गए थे। इसके बाद सरकार ने डेटा लोकलाइजेशन और लियमित रिपोर्टिंग को अनिवार्य कर दिया है।
ट्रायल के दौरान कंपनी अपनी सर्विस आम लोगों को नहीं दे पाएगी। इस समय जो भी डेटा तैयार होगा, उसे भारत के अंदर ही सुरक्षित रखना होगा। इसके अलावा, हर 15 दिन में Starlink को दूरसंचार विभाग और सुरक्षा एजेंसियों को रिपोर्ट भेजनी होगी, जिसमें यह जानकारी होगी कि उनके स्टेशन कहां हैं, कौन-से टर्मिनल इस्तेमाल हो रहे है और यूजर्स की लोकेशन क्या है।
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