एसबीआई की नई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 45.6% परिवार अब डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन शॉपिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, आय के आधार पर इसमें अभी भी काफी अंतर है।
नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है कि देश के करीब 45.6 प्रतिशत परिवार अब कम से कम एक उपभोग वस्तु खरीदने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बढ़ता डिजिटल चलन
एसबीआई की इस रिपोर्ट से देश में बदलते खर्च करने के तौर-तरीकों का पता चलता है। हालांकि, आंकड़े यह भी बताते हैं कि अब भी 54.4 प्रतिशत परिवार अपनी रोजाना की खरीदारी के लिए पारंपरिक और ऑफलाइन तरीकों पर ही पूरी तरह निर्भर हैं।
किस सेक्टर में कितनी हिस्सेदारी?
विभिन्न श्रेणियों में डिजिटल ट्रांजैक्शन का दायरा अलग-अलग है। ऑनलाइन खरीदारी में उपभोग की वस्तुओं और सेवाओं का हिस्सा सबसे ज्यादा 39.68 प्रतिशत है। इसके बाद 23.3 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ टिकाऊ वस्तुओं (ड्यूरेबल्स) का नंबर आता है। वहीं, खाने-पीने की चीजों पर होने वाले खर्च में डिजिटल लेनदेन की हिस्सेदारी महज 7.10 प्रतिशत ही है।
एसबीआई रिपोर्ट में बताया गया है, "कुल घरेलू उपभोग खर्च में खाने-पीने पर होने वाला खर्च लगभग 32.82 प्रतिशत है, जो हमारी बुनियादी जरूरतों की अहमियत को बरकरार रखता है।" फूड कैटेगरी में किराना सामान खरीदने के लिए सबसे ज्यादा 4.29 प्रतिशत डिजिटल भुगतान होता है। इसके मुकाबले हरी सब्जियां, ताजे फल और मांस-मछली जैसे जल्दी खराब होने वाले सामानों के लिए लोग आज भी नकद या ऑफलाइन माध्यमों को ही प्राथमिकता देते हैं।
आमदनी का फर्क और राज्यों की स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक, कमाई के हिसाब से डिजिटल खरीदारी में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। 'मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय' (MPCE) बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन शॉपिंग का ग्राफ भी ऊपर उठता जाता है। निचले पायदान के 20% परिवारों में यह आंकड़ा 25.3% है, जबकि सबसे अमीर 20% परिवारों में यह उछलकर 69.5% पर पहुंच जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "सबसे निचले और सबसे ऊपरी आय समूहों के बीच 44.3 प्रतिशत अंकों का यह अंतर, डिजिटल माध्यमों को अपनाने में उपभोग के स्तर का बड़ा फासला दिखाता है।" राज्यों की सूची में बात करें तो खाने-पीने, उपभोग और टिकाऊ सामानों के औसत मासिक खर्च के मामले में हरियाणा सबसे आगे है। इसके अलावा गोवा, नागालैंड और केरल भी प्रमुख श्रेणियों में आगे हैं। अंत में रिपोर्ट यह भी बताती है कि डिजिटल माध्यम अपनाने वाले परिवारों का खर्च (MPCE) पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करने वालों से औसतन 7.5% अधिक होता है।
(इनपुट: ANI)
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