सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण रोधी कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है।
धर्मांतरण रोधी कानूनों के खिलाफ सुनवाई तत्काल नहीं
याचिकाएं अगले माह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होंगी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण रोधी कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। ये याचिकाएं उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के धर्मांतरण रोधी कानूनों के खिलाफ दायर की गई हैं।
एक याचिकाकर्ता के वकील ने तुरंत सुनवाई करने और धर्मांतरण रोधी कानूनों पर रोक लगाने की मांग की है। इस पर प्रधान न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। पीठ ने कहा कि याचिकाएं दिसंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की जाएंगी।
इससे पहले धर्मांतरण रोधी कानून पर रोक की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को विभिन्न राज्यों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा था। पीठ ने तब राज्यों को उनके जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था और इसके बाद याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह में अपना उत्तर दाखिल करने की अनुमति दी थी। इस मामले को छह सप्ताह के बाद सूचीबद्ध किया गया था। पीठ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक द्वारा बनाए गए धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
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