वक्फ से जुड़े सभी विवादों का निपटारा करने का सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता।
वक्फ मामले: सिविल कोर्ट का अधिकार – SC
वक्फ से जुड़े सभी विवादों का निपटारा करने का सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। वक्फ से जुड़े सभीविवादों अनिवार्य रूप से वक्फ ट्रिब्यूनल की ओर से ही किया जाए, ऐसा नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एक मामले की सुनवाई करते हुए दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक फैसले में स्पष्ट किया कि वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 85 के तहत सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि किसी संपत्ति के वक्फ होने या न होने का विवाद वक्फ ट्रिब्यूनल तभी तय कर सकता है, जब वह संपत्ति विधिवत औकाफ की सूची में शामिल हो। अदालत ने कहा है कि वक्फ से जुड़े सभी विवादों का निपटारा अनिवार्य रूप से वक्फ ट्रिब्यूनल की ओर से ही किया जाए, ऐसा नहीं माना जा सकता।
वक्फ ट्रिब्यूनल का दायरा सीमित
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ अधिनियम की धारा 83 को इस प्रकार नहीं पढ़ा जा सकता कि वह ट्रिब्यूनल को उन विषयों पर भी अधिकार प्रदान करे जिन पर अधिनियम की अन्य धाराओं के तहत पहले से अधिकार नहीं दिया गया है। पीठ ने सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 9 का उल्लेख करते हुए कहा है कि यदि किसी कानून के तहत वक्फ ट्रिब्यूनल का अंतिम आदेश हो, तब भी अदालत को यह देखना आवश्यक है कि क्या ट्रिब्यूनल वह राहत देने में सक्षम है। यदि ट्रिब्यूनल के पास ऐसी शक्ति नहीं है तो सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को बाहर नहीं किया जा सकता। यह मामला हबीब अलादीन और अन्य की ओर से दायर अपील से संबंधित था।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि विवादित संपत्ति न तो वक्फ अधिनियम के अध्याय-दो के तहत प्रकाशित औकाफ की सूची में शामिल थी और न ही अध्याय-पांच के तहत वक्फ बोर्ड में पंजीकृत थी। ऐसे में यह तय करने का प्रश्न कि संपत्ति वक्फ है या नहीं, वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
यह भी पढ़े: ममता बनर्जी से चुनाव आयोग: 2 फरवरी
https://www.primenewsnetwork.in/india/mamata-banerjee-to-meet-election-commission-on-feb-2/130995