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परीक्षा से पहले बौध बनने पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा के एक परिवार के परीक्षा से पहले अल्पसंख्यकों को मिलने वाला लाभ पाने के लिए बौध धर्म स्वीकार करने के दावे पर सवाल किया है।

परीक्षा से पहले बौध बनने पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल

SC Slams Family for Converting to Buddhism to Seek Minority Quota Benefits |

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा के एक परिवार के परीक्षा से पहले अल्पसंख्यकों को मिलने वाला लाभ पाने के लिए बौध धर्म स्वीकार करने के दावे पर सवाल किया है। साथ में अल्पसंख्यक का प्रमाणपत्र जारी करने पर जवाब भी मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यामूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने इस प्रयास की तीखी आलोचना की और परिवार के इरादे पर संदेह व्यक्त किया। कृष्णा पुनिया के बच्चे नितिन पुनिया और एकता पुनिया की ओर से दायर याचिका में यह मामला उठाया गया है। पुनिया परिवार हिसार के जाट समुदाय का है। यह जन्म से ही सामान्य वर्ग का है।

मेडिकल कोटे की खातिर पूरी कवायद

अदालत में दी गई दलील में कहा गया कि याचिकाकार उत्तर प्रदेश में सुभारती विश्वविद्यालय के सुभारती मेडिकल कॉलेज में बौध अल्पसंख्यक कोटे से एडमिशन के लिए चयनित हुआ था। लेकिन नीट पीजी कोर्स में नामांकन नहीं हो पाया।

फायदा उठाने के लिए धर्म का सहारा लेना धोखाधड़ी

याचिकाकार ने हिसार सब डिविजनल अफसर से बौध अल्पसंख्यक का प्रमाणपत्र हासिल कर लिया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2016 से ही प्रावधान किया है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की ओर से मान्यता के बावजूद उत्तर प्रदेश के संबंधित प्रधिकारी से मान्यता जरूरी है। संबंधित अधिकारियों ने प्रवेश की अनुमति दे दी थी लेकिन राज्य सरकार ने मान्यता देने इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान न्याय पीठ ने मौखिक रूप से कड़ी टिप्पणी की और कहा कि यह एक तरह की धोखाधड़ी है।

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