बस्तर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल में दशकों से चल रही माओवादी हिंसा के खिलाफ अभियान निर्णायक चरण में पहुंच गई है।
नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर-
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल में दशकों से चल रही माओवादी हिंसा के खिलाफ अभियान निर्णायक चरण में पहुंच गई है। सुरक्षा बलों की नजर बस्तर के आख़िरी बड़े माओवादी कमांडर पापाराव पर टिकी है। उन्हें लाल गलियारों में संगठन की रीढ़ माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि सुरक्षाबलों ने पापाराव की मौजूदगी को लेकर सटीक इनपुट मिलने के बाद इलाके में घेराबंदी और सघन सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। डीआरजी, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीमें जंगलों में मोर्चा संभाललिया है। ड्रोन, सैटेलाइट फोन ट्रैकिंग और स्थानीय खुफिया नेटवर्क की मदद से नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
फाइनल पुश-
बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में शीर्ष माओवादी नेतृत्व के सफाए के बाद संगठन बिखराव की स्थिति में है। ऐसे में पापाराव की गिरफ्तारी या न्यूट्रलाइजेशन को नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को “फाइनल पुश” के तौर पर देख रही हैं, ताकि बस्तर में स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक बढ़त मिल सके।
सुरक्षा बल सतर्क-
सुरक्षा बल ऑपरेशन को लेकर पूरी सतर्क हैं। जंगलों में छिपे नक्सलियों की ओर से आईईडी और घात लगाकर हमले की आशंका को देखते हुए हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है।
क्या अभियान बस्तर के इतिहास में निर्णायक होगा-
अब सवालहै कि क्या यह तलाश अंत तक पहुंचेगी या फिर पापाराव एक बार फिर सुरक्षा बलों को चकमा देने में कामयाब होगा। आने वाले दिन बस्तर के नक्सल इतिहास में निर्णायक साबित हो सकते हैं।
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