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समुद्री-रक्षा सहयोग पर डोवाल की रूस से वार्ता की

पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की जरूरतः डोवाल

रूस में भारतीय दूतावास ने बताया कि पहले दिन में, डोवाल ने प्रथम उप प्रधान मंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की और रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की जरूरतः डोवाल

मास्को। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने मॉस्को में शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति के सहयोगी और वहां के मारिटाइम बोर्ड के अध्यक्ष निकोलाई पत्रोसेव से मुलाकात की। दोनों पक्षों में महत्वपूर्ण समुद्री और रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय पहलों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान पिछले वर्ष नवंबर में पतरुशेव की नई दिल्ली यात्रा के दौरान जिन प्रस्तावों पर चर्चा हुई उनका आकलन किया गया। इस अवसर पर डोवाल ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष पर सहयोग की समीक्षा

रूस में भारतीय दूतावास ने बताया कि दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इससे पहले दिन में, डोवाल ने प्रथम उप प्रधान मंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की और रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। रूसी पक्ष ने अपने राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र और रोस्कोस्मोस संयुक्त उद्योग सूचना केंद्र के दौरे का आयोजन किया।

दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक पर भी चर्चा

डोवाल ने प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच के दौरान रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से भी मुलाकात की और रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक संबंधों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की। दूतावास ने बताया कि दोनों पक्षों ने नई दिल्ली में होने वाली आगामी ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक पर भी चर्चा की।

होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने पर जोर

फोरम में अपने भाषण में, डोवाल ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया, और होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर सहित अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से व्यापार के सुरक्षित और निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डोवाल ने कहा- 'वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सुरक्षित और निर्बाध संचालन आवश्यक है। भारत तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के सभी प्रयासों में रचनात्मक योगदान देने के लिए तैयार है।'

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