उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की शूगर मिलों में उत्पादन बढ़ने से देश में कुल चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्य उत्पादक राज्यों में तेज़ पेराई का असर
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की शूगर मिलों में उत्पादन बढ़ने से देश में कुल चीनी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। चालू पेराई सत्र 2025-26 में अक्टूबर से जनवरी की अवधि के दौरान चीनी उत्पादन 18.35 प्रतिशत बढ़कर 1.95 करोड़ टन तक पहुंच गया है। पिछले सत्र की इसी अवधि में चीनी उत्पादन 1.64 करोड़ टन रहा था। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) ने पेराई सत्र के आंकड़े जारी करते हुए बताया कि प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में उत्पादन बढ़ने के कारण यह वृद्धि दर्ज की गई है। उल्लेखनीय है कि देश में चीनी सत्र अक्टूबर से सितंबर तक चलता है।
देशभर में 515 चीनी मिलें चालू
ISMA के अनुसार, वर्तमान में देशभर में 515 चीनी मिलें संचालित हो रही हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 501 मिलें चालू थीं। मिलों की संख्या बढ़ने से पेराई क्षमता में भी इजाफा हुआ है। महाराष्ट्र में 31 जनवरी तक चीनी उत्पादन 42 प्रतिशत बढ़कर 78.7 लाख टन पर पहुंच गया है। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में इस समय 206 मिलों का संचालन हो रहा है, जबकि एक साल पहले इनकी संख्या 190 थी।
उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर कायम
महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य बना हुआ है। यूपी में अब तक चीनी उत्पादन 55.1 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत अधिक है।
कर्नाटक में भी तेज़ हुई पेराई
ISMA ने बताया कि तीसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य कर्नाटक में भी पेराई की गति तेज रही है। वहां चीनी उत्पादन पिछले सत्र की समान अवधि की तुलना में करीब 15 प्रतिशत बढ़ा है।
पूरे सत्र के लिए उत्पादन बढ़ने का अनुमान
ISMA का अनुमान है कि 2025-26 के पूरे पेराई सत्र में देश का शुद्ध चीनी उत्पादन 18.6 प्रतिशत बढ़कर 3.09 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। पिछले सत्र में यह आंकड़ा 2.61 करोड़ टन रहा था।
सैटेलाइट इमेज से गन्ना क्षेत्र का आकलन
ISMA ने अपनी प्रेस रिलीज़ में बताया कि बचे हुए कटाई योग्य गन्ने के क्षेत्र का आकलन करने के लिए पूरे भारत की सैटेलाइट इमेज लेने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही ISMA की एग्रीकल्चर टीम प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में खड़ी फसल का ज़मीनी सर्वे भी कर रही है।
फरवरी में जारी होगा तीसरा अग्रिम अनुमान
खेत की स्थिति, सैटेलाइट डेटा, अब तक की अनुमानित उपज और रिकवरी तथा शेष सीज़न के लिए अपेक्षित उत्पादन के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर ISMA फरवरी 2026 में चीनी उत्पादन का तीसरा अग्रिम अनुमान जारी करेगा।
बढ़ रहा गन्ना भुगतान का बकाया
ISMA के महानिदेशक डीजी बल्लानी ने कहा कि जैसे-जैसे सीज़न आगे बढ़ रहा है और चीनी का स्टॉक बढ़ता जा रहा है, गन्ने के भुगतान का बकाया भी ऊपर की ओर ट्रेंड दिखा रहा है। चीनी उत्पादन लागत और बिक्री से होने वाली आय के बीच असंतुलन के कारण उद्योग पर ऑपरेशनल और कैश-फ्लो का दबाव बढ़ रहा है।
MSP में संशोधन की ज़रूरत
उन्होंने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में जल्द संशोधन बेहद आवश्यक है। इससे सेक्टर की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी, किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान किया जा सकेगा और सरकार पर बिना अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बाजार में संतुलन बना रहेगा।
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