Supreme Court : रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डरों की धोखाधड़ी रोकने और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए गठित नियामक प्राधिकरण रेरा RERA - Real Estate Regulatory Authority...
Supreme Court : रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डरों की धोखाधड़ी रोकने और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए गठित नियामक प्राधिकरण "रेरा" (RERA - Real Estate Regulatory Authority) की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाये हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) डिफॉल्टर बिल्डरों को सुविधा देने के अलावा कुछ नहीं कर रहा है। इसे खत्म कर दिया जाए तो आपत्ति नहीं होगी। ऐसे में अब वक्त आ गया है कि सभी राज्य इस संस्था के पुनर्गठन पर फिर से विचार करें।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की कार्यप्रणाली पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रेरा अब केवल डिफॉल्टर बिल्डर्स को बचाने का जरिया बनकर रह गया है, इसलिए इसे खत्म कर देना ही बेहतर होगा।
जोयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान काफी सख्त रवैया अपनाया। शीर्ष अदालत हिमाचल प्रदेश सरकार व अन्य की ओर से राज्य के रेरा कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
मालूम हो कि रेरा (RERA - Real Estate Regulatory Authority), 2016 रियल एस्टेट सेक्टर को विनियमित करने, पारदर्शिता लाने और घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने वाली एक सरकारी संस्था है। इसके मुख्य कार्यों में प्रोजेक्ट्स का अनिवार्य पंजीकरण, बिल्डरों की जवाबदेही तय करना, निर्माण में देरी या धोखाधड़ी पर पेनल्टी लगाना और विवादों का त्वरित समाधान करना शामिल है। पर अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद इस नियामक संस्था पर सवालिया निशान लग गया है।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस
जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, रेरा जिन लोगों के लिए बनाया गया था, वे पूरी तरह से निराश और हताश हैं। यदि इस संस्था को खत्म कर दिया - जाए, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। इन टिप्पणियों के बाद याचिका पर नोटिस जारी करते हुए पीठ ने कहा, राज्य को रेरा कार्यालय को अपनी इच्छानुसार जगह पर स्थानांतरित करने की अनुमति है। हालांकि, यह हाईकोर्ट में लंबित रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा। पीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार व अन्य की याचिका पर नोटिस जारी किया है।
याचिका में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने रेरा कार्यालय के स्थानांतरण से संबंधित जून, 2025 की अधिसूचना पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। बाद में, पिछले साल 30 दिसंबर को हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश को जारी रखने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस निर्देश पर रोक लगा दी।
सीजेआई ने कहा, हर राज्य में यह पुनर्वास केंद्र बन गया है। पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब उन्हें बताया गया कि रेरा में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को नियुक्त किया गया है। सीजेआई ने कहा कि सभी प्राधिकरण इन्हीं (सेवानिवृत्त) लोगों से भरे पड़े हैं। यह संस्था वास्तव में अब किसके लिए काम कर रही है, यह आपको इन लोगों से मिलने पर पता चलेगा। हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता ने पीठ को बताया, नीतिगत निर्णय के अनुसार, राज्य पालमपुर, धर्मशाला और अन्य शहरों का विकास कर रहा है।
सीजेआई ने इस पर पूछा, एक सेवानिवृत्त नौकरशाह की क्या जरूरत है? वह पालमपुर के विकास में कैसे मदद कर पाएगा? आपको किसी ऐसे वास्तुकार की सेवाएं लेनी चाहिए, जो पर्यावरण के प्रति जागरूक हो, जो पालमपुर, धर्मशाला और इन सभी क्षेत्रों से अच्छी तरह परिचित हो। केवल वही लोग मदद कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/world/nuclear-arms-control-agreement-between-america-and-russia-ends/132101