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सुप्रीम कोर्ट की व्हाट्सऐप-मेटा को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने लगायी व्हाट्सऐप और मेटा को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर मेटा और व्हाट्सऐप की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोई भी कंपनी डेटा शेयरिंग के नाम पर देश की जनता की निजता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने लगायी  व्हाट्सऐप और मेटा को फटकार

Supreme Court |

प्राइवेसी पॉलिसी पर सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर "मेटा" और "व्हाट्सऐप" की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोई भी कंपनी डेटा शेयरिंग के नाम पर देश की जनता की निजता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकती है। शीर्ष अदालत ने "मेटा" और "व्हाट्सऐप" को कड़ी फटकार लगाते हुए यह भी कहा कि अगर कोई कंपनी भारत के संविधान का पालन नहीं कर सकती तो उसे यहां पर काम करने का हक नहीं है।

नियम नहीं मानेंगे तो देश छोड़िए

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर भारत के नियम नहीं मानने हैं तो आपको देश छोड़कर निकल जाना चाहिए। कोर्ट में "मेटा" और "व्हाट्सऐप" ने कॉम्पटीशन कमिशन ऑफ इंडिया के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उन पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

9 फरवरी को आएगा अंतरिम आदेश

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची, जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि 9 फरवरी को इस मामले में अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस देश में निजता के अधिकार की सख्ती से रक्षा की जाती है।

आम यूजर के लिए पॉलिसी समझना मुश्किल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों की गोपनीयता संबंधी शर्तें इतनी चालाकी से तैयार की गई हैं कि आम नागरिक उन्हें समझ ही नहीं पाएंगे और ये कंपनियां उनका डेटा चोरी करती रहेंगी। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसे किसी भी डेटा शेयरिंग की अनुमति नहीं देगा, जिसमें उपभोक्ताओं से आसान या भ्रामक समझौते कराए गए हों।

‘ऑप्ट आउट का विकल्प कहां है?’

सुप्रीम कोर्ट ने "व्हाट्सऐप" और "मेटा" की याचिकाओं के मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया और कहा कि नौ फरवरी को अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर कोई यूजर अपना डेटा साझा नहीं करना चाहता तो उसे ऑप्ट आउट का विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा है।

टेक कंपनियों को खुली छूट नहीं

कोर्ट ने साफ कहा कि टेक जॉयन्ट्स को इस तरह से यूजर्स का डेटा शेयर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। यह निजता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

व्हाट्सऐप की दलील

वहीं व्हाट्सऐप की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि प्लेटफॉर्म की पॉलिसी से बाहर रहने का भी विकल्प मौजूद है। उन्होंने बताया कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने नवंबर 2024 में एक आदेश पारित किया था।

‘मानो या छोड़ो’ नीति पर जुर्माना

CCI ने 2021 की व्हाट्सऐप गोपनीयता नीति की जांच में पाया कि यूजर्स पर ‘मानो या छोड़ दो’ की नीति थोप दी गई थी और उन्हें ऑप्ट आउट का विकल्प नहीं दिया गया। इसे प्रतिस्पर्धा नियम 2002 के खिलाफ मानते हुए कंपनी पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

सीजेआई का व्यक्तिगत उदाहरण

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आप यहां सर्विस देने के लिए हैं, डेटा इकट्ठा कर शेयर करने के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी हमें भी आपकी पॉलिसी समझने में दिक्कत होती है, तो बिहार के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग इसे कैसे समझेंगे?

विज्ञापनों की बाढ़ का जिक्र

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने एक व्यक्तिगत उदाहरण देते हुए कहा, “डॉक्टर व्हाट्सऐप पर तीन दवाइयों के नाम भेजते हैं और पांच मिनट के भीतर उन्हीं दवाओं से जुड़े विज्ञापनों की बाढ़ आ जाती है।” कोर्ट ने साफ किया कि यूजर्स की निजता और सूचित सहमति पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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