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ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद

अंकित शर्मा हत्या मामला: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्या मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला। ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने फांसी की मांग खारिज कर भारी जुर्माना भी लगाया।

अंकित शर्मा हत्या मामला ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला

Karkardooma Court sentences Tahir Hussain to life imprisonment (File Photo) |

नई दिल्ली। दिल्ली के उत्तर-पूर्वी दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस जघन्य अपराध को बर्बर करार देते हुए कहा कि यह घटना समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली है, हालांकि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' (सबसे दुर्लभ से दुर्लभ) की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए दोषियों को फांसी के बजाय उम्रकैद दी जा रही है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) ने हत्या के मामले में ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्य दोषी ताहिर हुसैन पर 5 लाख रुपये और अन्य चारों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अपहरण के मामले में सभी को अलग से 7 साल की कैद की सजा सुनाई गई है। इस दौरान कोर्ट ने ताहिर हुसैन पर 50,000 रुपये और अन्य दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने और दंगा करने के अन्य आरोपों में भी सजा सुनाई गई है। सुनवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और फैसला आने के बाद दोषियों के परिजन कोर्ट रूम में ही फूट-फूटकर रो पड़े।

मामले की मुख्य क्रोनोलॉजी और पृष्ठभूमि

  • फरवरी 2020: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए भीषण दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी और उनका क्षत-विक्षत शव एक नाले से बरामद हुआ था।
  • 13 जुलाई: कड़कड़डूमा कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद पूर्व एमसीडी पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य को अंकित शर्मा की हत्या और अपहरण का दोषी करार दिया था।
  • 27 जुलाई: अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने कोर्ट में दलील देते हुए इस अपराध को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' बताया और सभी दोषियों के लिए मृत्युदंड (फांसी) की मांग की।
  • 31 जुलाई: अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए पांचों दोषियों को उम्रकैद और भारी जुर्माने से दंडित किया।

अभियोजन और बचाव पक्ष की तीखी बहस

सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (SPP) मधुकृत पांडे ने दोषियों के लिए फांसी की मांग करते हुए अदालत को बताया था कि अंकित शर्मा के शरीर पर 51 गंभीर चोटें थीं, जिनमें से 7 चोटें अकेले मौत का कारण बनने के लिए काफी थीं। उन्होंने दलील दी, "ये दोषी दरिंदे बन चुके थे, उन्होंने अपराध करते समय मानवता की सारी हदें पार कर दीं। हत्या बहुत ही क्रूरता और सोची-समझी साजिश के तहत भारी काटने वाले हथियारों से की गई थी।"

दूसरी ओर, ताहिर हुसैन के वकील राजीव मोहन ने नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि पुलिस ट्रायल के दौरान किसी भी गहरी साजिश (Conspiracy) या प्रत्यक्ष भूमिका (Specific Role) को साबित करने में विफल रही है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि ताहिर हुसैन पर आरोप सिर्फ भीड़ का हिस्सा होने और सामान्य मंशा (Common Intention) के आधार पर तय किए गए हैं, इसलिए हर हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती। दोषियों के अन्य वकीलों ने भी उनके पारिवारिक दायित्वों और बच्चों का हवाला देते हुए कम सजा की गुहार लगाई थी।

सुनवाई के दौरान ताहिर हुसैन की वकील तारा नरुला ने अदालत को बताया कि उनके तीन बच्चे, एक गृहिणी पत्नी और बुजुर्ग पिता हैं। परिवार की आय का अन्य कोई स्रोत नहीं है, सिवाय उस हिस्से के किराए के जो 83,000 रुपये है। वहीं, अन्य दोषियों के वकीलों ने उन्हें अपने परिवारों का इकलौता कमाने वाला बताते हुए नरमी की अपील की थी।

फैसला सुनाए जाने के वक्त कोर्ट रूम में भारी पुलिस बल तैनात रहा। इसमें क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर सुरेंद्र कुमार भी मौजूद थे। सजा के ऐलान के बाद दोषियों के परिजन फूट-फूटकर रो पड़े। वहीं, फैसले से असंतुष्ट पक्ष ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
​(इनपुट: ANI)

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