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केंद्र जल्द बढ़ा सकता है चीनी का समर्थन मूल्य

केंद्र सरकार जल्द बढ़ा सकता है चीनी का समर्थन मूल्य, शुगर मिलों की मांग पर केंद्र कर रहा विचार

Sugar MSP : देश में चीनी मिलों को नकदी संकट से उबारने के लिए केन्द्र सरकार जल्द ही चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है.

केंद्र सरकार जल्द बढ़ा सकता है चीनी का समर्थन मूल्य शुगर मिलों की मांग पर केंद्र कर रहा विचार

केंद्र सरकार जल्द बढ़ा सकता है चीनी का समर्थन मूल्य |

Sugar MSP : देश में चीनी मिलों को नकदी संकट से उबारने के लिए केन्द्र सरकार जल्द ही चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। केन्द्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और अन्य राहत देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

चोपड़ा ने कहा, उन्होंने (इस्मा) हमें बताया कि गन्ने के बकाया से संबंधित समस्या जनवरी के मध्य से शुरू होगी। हम उस समय सीमा से अवगत हैं और इस पर काम कर रहे हैं। अगले एक महीने में हम कुछ ऐसे फैसले लेंगे, जो उद्योग की मदद करेंगे और किसानों को समय पर भुगतान भी सुनिश्चित करेंगे।

केन्द्रीय खाद्य सचिव ने कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें एमएसपी में संशोधन, मौजूदा 15 लाख टन से अधिक निर्यात की अनुमति देना, और अधिक इथेनॉ के लिए आवंटन जैसे उपाय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी, 2019 से चीनी का एमएसपी 31 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर अपरिवर्तित है।

इस्मा ने इसे बढ़ाकर 41.66 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग की है। चोपड़ा ने यह स्वीकार किया कि अतिरिक्त चीनी इस साल एक चुनौती है। उन्होंने कहा, हम इन सभी पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं और उम्मीद है कि हम ऐसे समाधान लेकर आएंगे, जो चीनी उद्योग के सभी अंशधारकों को उनका हक दिलाएंगे।

चीनी मिलों के संगठन "भारतीय चीनी एवं जैव-इंधन विनिर्माता संघ" (इस्मा) ने बताया कि मिलों गन्ने का बकाया लगातार बढ़ रहा है। गत 30 नवंबर तक महाराष्ट्र में यह 2,000 करोड़ रुपये था। इस साल चीनी का उत्पादन बढ़ने के आसार हैं। ऐसे में मिलें अतिरिक्त स्टॉक, उत्पादन की उच्च लागत, इथेनॉल के लिए कम आवंटन, घरेलू कीमतों में गिरावट और वैश्विक स्तर पर अधिक उत्पादन के कारण नकदी संकट का सामना कर रही हैं।

देश का चीनी उत्पादन 2025-26 सत्र (अक्तूबर-सितंबर) में 3.43 करोड़ टन होने का अनुमान है, जो अधिक गन्ना उत्पादन के कारण होगा। चूंकि, गन्ने या चीनी आधारित शौरे से इथेनॉल का आवंटन सिर्फ 28 फीसदी रहा है, इसलिए करीब 34 लाख टन चीनी हस्तांतरित किया जाएगा। चोपड़ा ने कहा, हमने सोचा था कि यह अधिक होगा, लेकिन अब हमारे सामने ऐसी स्थिति है, जहां यह 34 लाख टन ही है। सरकार ने उद्योग की मदद के लिए पहल ही 15 लाख टन नियांत की अनुमति दे दी है।

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