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थूथुकुडी में नमक की खेती पर कुदरत की मार

थूथुकुडी में नमक की खेती पर कुदरत की मार: 500 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

कलवासल इलाके में कुछ महीने पहले हुई मूसलाधार बारिश ने वहां के किसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश का पानी सड़कों से बहते हुए नमक के खेतों में जाकर जमा हो गया।

थूथुकुडी में नमक की खेती पर कुदरत की मार 500 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

Thoothukudi Salt Production Grinds to a Halt as Rains Destroy Livelihoods |

थूथुकुडी (तमिलनाडु )। कलवासल इलाके में कुछ महीने पहले हुई मूसलाधार बारिश ने वहां के किसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश का पानी सड़कों से बहते हुए नमक के खेतों में जाकर जमा हो गया। इससे महीनों बाद भी नमक का उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है जिससे नमक की खेती करने वाले मजदूरों के सामने रोजी रोजी का संकट खड़ा हो गया है।

तीन महीने से काम ठप, आजीविका पर वार

थूथुकुडी के सबअर्बन इलाके, कलवासल की पूरी अर्थव्यवस्था नमक पर टिकी है। यहां के सैकड़ों परिवार अपनी रोज़ी-रोटी के लिए पूरी तरह से इन नमक के तालाबों पर निर्भर हैं। नमक के तालाबों में काम करने वाले मज़दूरों का कहना है कि बारिश का पानी पूरी तरह से निकलने और नमक के तालाबों को फिर से चालू होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। इस वजह से, पिछले तीन महीनों में नमक का प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे 500 से ज़्यादा परिवारों की रोज़ी-रोटी चली गई है।

सफेद मैदान बने पक्षियों का बसेरा

इस साल की भारी बारिश से बने हालात ने इस इलाके को पक्षियों के लिए एक अच्छी जगह बना दिया है। यहां जमा हुए पानी के कारण खेत तालाब की तरह दिखने लगे हैं। इसमें छोटी मछलियों, कीड़ों और पानी के दूसरे जीवों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है जिसे खाने के लिए यहां दुर्लभ जलीय पक्षी डेरा डाले हुए हैं। ऐसा नजारा थूथुकुडी के नमक के खेतों में कम ही देखने को मिलता है।

आसमान में 'रोजी स्टार्लिंग' का अद्भुत नजारा

पिछले कुछ महीनों में, थूथुकुडी जिले में रोज़ी स्टार्लिंग पक्षियों के बड़े झुंड भी देखे गए हैं, जो आसमान में उड़ते हुए शानदार आकृतियाँ बना रहे हैं। पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार, ये प्रवासी पक्षी उत्तर-पश्चिम एशिया और पूर्वी यूरोप से उड़कर दक्षिण भारत के जिलों में आते हैं। पिछले महीने और आज के नज़ारों में इतना बड़ा अंतर बारिश के पहले कभी न हुए नेचर को दिखाता है, खासकर उस इलाके में जो अपनी मनमोहक सुंदरता के लिए जाना जाता है।

कुदरत के दो चेहरे

थूथुकुडी की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे कुदरत के दो अलग-अलग पहलुओं को दिखाती हैं। एक तरफ पक्षियों का कलरव और प्रकृति की सुंदरता है, तो दूसरी तरफ उन मजदूरों का संघर्ष जो पानी के उतरने और दोबारा काम शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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