तिब्बती समुदाय के युवाओं ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में चीनी दूतावास के बाहर तिब्बत की स्वतंत्रता और तिब्बतियों के मानवाधिकारों की सुरक्षा की मांग करते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।
नई दिल्ली। तिब्बती युवा कांग्रेस के बैनर तले तिब्बती समुदाय के युवाओं ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में चीनी दूतावास के बाहर तिब्बत की स्वतंत्रता और तिब्बतियों के मानवाधिकारों की सुरक्षा की मांग करते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। आज मंगलवार को तिब्बती समुदाय द्वारा 67वें तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में प्रदर्शनकारी दूतावास के पास जमा हुए और "तिब्बत को मुक्त करो" जैसे नारे लगाते हुए तिब्बती मुद्दे के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की अपील की।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
सुरक्षाकर्मियों द्वारा भीड़ को तितर-बितर करने के प्रयास के दौरान पुलिस ने बाद में कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और उन्हें बसों में बिठाकर ले गई। एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग तिब्बत को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में बहाल करना है। प्रदर्शनकारी ने कहा कि "हम अपना देश वापस चाहते हैं। बस यही हमारी मांग है। इससे ज्यादा कुछ नहीं। हमारे कई लोगों ने हमारे देश के लिए अपनी जान कुर्बान की है और हम न्याय चाहते हैं। हम यह भी चाहते हैं कि दूसरे देश हमारी मदद करें ताकि हम एक बेहतर दुनिया और एक बेहतर देश बना सकें।"
युवाओं की तिब्बत को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की मांग
पुलिस द्वारा ले जाए जा रहे एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि तिब्बती लोग अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र देखना चाहते हैं। सुरक्षाकर्मियों द्वारा हटाए जाने से पहले उन्होंने कहा, "हमें अपने तिब्बत की चिंता है। हम वास्तव में चाहते हैं कि तिब्बत एक स्वतंत्र देश बने।" एक महिला प्रदर्शनकारी ने चीन से तिब्बती राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और तिब्बतियों के लिए बुनियादी मानवाधिकार सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया। महिला ने कहा कि, "हम चाहते हैं कि चीनी दूतावास और CCP तिब्बत में बंद तिब्बती राजनीतिक कैदियों को रिहा करें। हम बुनियादी मानवाधिकार चाहते हैं। तिब्बत के अंदर रहने वाले तिब्बती हमसे कहीं ज्यादा संघर्ष कर रहे हैं।"

दलाई लामा की तिब्बत वापसी की अपील
प्रदर्शनकारी महिला ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति पर अधिक ध्यान देने की अपील की। उन्होंने आगे कहा, "तिब्बती लोग चाहते हैं कि 14वें दलाई लामा तिब्बत लौटें, जो हमारी अपनी मातृभूमि है। चीन हमें अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित नहीं करने दे रहा है।" विरोध प्रदर्शन के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने "आज़ाद तिब्बत" की मांग करते हुए नारे लगाए, जबकि कुछ ने चीन पर क्षेत्र में दमन का आरोप लगाया। बता दें कि यह विरोध प्रदर्शन तिब्बती समुदाय द्वारा 67वें तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के मौके पर और दुनिया भर के समर्थकों के समर्थन में आयोजित किया गया था। यह दिन 1959 की घटनाओं की याद दिलाने के साथ-साथ तिब्बतियों की सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक पहचान के संरक्षण की आकांक्षाओं को उजागर करने का एक मंच भी है।
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