भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) को ग्राहकों से संपर्क के लिए टेलीफोन और मोबाइल की ‘1600’ नंबर सीरीज का उपयोग करने का निर्देश दिया है।
ग्राहक सेवाओं के लिए ‘1600’ नंबर सीरीज अपनाने की सलाह
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) को ग्राहकों से संपर्क के लिए टेलीफोन और मोबाइल की ‘1600’ नंबर सीरीज का उपयोग करने का निर्देश दिया है। हालांकि, यह कदम साइबर फ्रॉड रोकने के लिहाज से अहम माना जा रहा है, लेकिन बैंक और एनबीएफसी इसे लेकर असहज नजर आ रहे हैं।
साइबर फ्रॉड और स्पैम पर लगाम की कोशिश
ट्राई ने साइबर धोखाधड़ी, स्पैम कॉल और अनचाहे संदेशों से होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने के उद्देश्य से यह निर्देश जारी किया है। इसके तहत बैंकों और अन्य ऋणदाता संस्थानों को ग्राहकों को की जाने वाली वॉयस कॉल के लिए ‘1600’ नंबर सीरीज अपनाने की सलाह दी गई है।
कर्ज वसूली को लेकर बढ़ी चिंता
बैंकों और एनबीएफसी की सबसे बड़ी चिंता कर्ज वसूली को लेकर है। आशंका जताई जा रही है कि एक तय नंबर सीरीज देखकर कई कर्जदार कॉल रिसीव करने से बच सकते हैं। इससे ऋण वसूली की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और वसूली लक्ष्य पूरे करना मुश्किल हो जाएगा।
बढ़ सकती है लागत और मैनपावर
सूत्रों के अनुसार, 1600 नंबर सीरीज लागू होने के बाद वित्तीय संस्थानों को कर्ज वसूली के लिए अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, ग्राहकों से संपर्क के लिए व्हाट्सऐप जैसे अन्य माध्यमों पर निर्भरता भी बढ़ानी पड़ सकती है। अनुमान है कि बकाया राशि के आधार पर ऋण वसूली की लागत 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
डिजिटल वसूली प्रक्रिया पर असर
ऋण वसूली से जुड़े एक प्रमुख फिनटेक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि 1600 सीरीज पूरी तरह लागू होने पर क्षेत्रीय संपर्क तंत्र पर निर्भरता काफी बढ़ जाएगी। उन्होंने माना कि यह कदम वित्तीय धोखाधड़ी कम करने में कारगर साबित हो सकता है, लेकिन डिजिटल माध्यमों पर आधारित वसूली प्रक्रिया के लिए यह चुनौतीपूर्ण होगा।
लागू करने की समयसीमा तय
ट्राई ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए इस व्यवस्था को 1 जनवरी से लागू करने की समयसीमा तय की है। वहीं, अन्य बड़े वित्तीय संस्थानों और एनबीएफसी के लिए यह क्रमशः 1 फरवरी और 1 मार्च से लागू होनी है।
ग्राहकों के लिए भरोसेमंद व्यवस्था
नियामक का मानना है कि 1600 नंबर सीरीज से आने वाली कॉल को देखकर ग्राहक अधिक भरोसा कर पाएंगे। बढ़ते वित्तीय फर्जीवाड़े के मामलों के बीच यह कदम उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में अहम माना जा रहा है।
बढ़ते फ्रॉड के बीच आया आदेश
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बैंकिंग तंत्र को धोखाधड़ी के कारण 21,515 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 30 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, इस दौरान धोखाधड़ी के मामलों की संख्या घटकर 5,092 रह गई, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम है।
निर्देश को लेकर असमंजस
फिलहाल बैंक और ऋणदाता संस्थान ट्राई के निर्देश को लेकर स्थिति स्पष्ट करने में जुटे हैं। वे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह आदेश केवल लेनदेन से जुड़ी कॉल पर लागू होगा या कर्ज वसूली जैसी प्रक्रियाओं पर भी।
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