तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए प्रदेश पर जबरन हिन्दी थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
चेन्नई। तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए प्रदेश पर जबरन हिन्दी थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रविवार को तिरुवोट्टियूर में 'वीर वणक्कम दिवस' के मौके पर आयोजित एक जनसभा में कहा कि राज्य केंद्र सरकार द्वारा "हिन्दी थोपने" का कड़ा विरोध करेगा और इसे स्वीकार नहीं करेगा।
'भाषा आंदोलन के शहीदों' को किया याद
उदयनिधि स्टालिन ने कार्यक्रम के दौरान 'भाषा आंदोलन के शहीदों' के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि तमिलनाडु के लोगों का विश्व इतिहास में एक खास स्थान है, जिन्होंने अपनी मातृभाषा की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी। उन्होंने कहा कि पेरियार ईवी रामासामी और पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई के समय में शुरू हुआ यह आंदोलन आज भी उसी जोश के साथ जारी है।
कई मातृभाषाओं को निगल जाती है हिन्दी: स्टालिन
उन्होंने कहा कि हरियाणा, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कभी बोली जाने वाली कई मातृभाषाएं हिन्दी के आने के बाद धीरे-धीरे खत्म हो गईं। उन्होंने कहा, "हिन्दी एक ऐसी भाषा बन गई है जो कई मातृभाषाओं को निगल जाती है, इसीलिए तमिलनाडु ने कथित हिन्दी थोपने का लगातार विरोध किया है।"
शिक्षा नीति और केंद्र के दबाव का विरोध
उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब कई अन्य राज्य भी भाषा अधिकारों पर तमिलनाडु के रुख का पालन करने लगे हैं। राज्य सरकार के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु हिन्दी थोपने, नई शिक्षा नीति और केंद्र सरकार के किसी भी अन्य दबाव का कड़ा विरोध करेगा।
DMK का आगामी चुनाव को लेकर भाषा की सियासत
गौरतलब है कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच लगातार खींचतान चल रही है, जिसमें DMK सरकार भाजपा पर हिन्दी थोपने का आरोप लगा रही है। इसी बीच, राज्य ने दो-भाषा फॉर्मूले के साथ राज्य शिक्षा नीति भी पेश की है। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब राज्य में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसमें DMK के नेतृत्व वाला गठबंधन AIADMK-BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ राज्य में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगा।
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