आयरलैंड में भारत के राजदूत श्री अखिलेश मिश्र के नेतृत्व में भारतीय समुदाय ने अत्यंत उल्लास और उत्साह के साथ उत्तर प्रदेश दिवस मनाया।
सांस्कृतिक विरासत की झलक
आयरलैंड में भारत के राजदूत श्री अखिलेश मिश्र के नेतृत्व में भारतीय समुदाय ने अत्यंत उल्लास और उत्साह के साथ उत्तर प्रदेश दिवस मनाया। यह दिवस 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर आयरलैंड में रह रहे भारतीयों ने प्रदेश की गौरवशाली पहचान को पूरे उत्साह के साथ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, पाककला, शिल्प और पर्यटन विरासत पर एक विशेष प्रस्तुति दी गई। इसके साथ ही पारंपरिक नृत्य, गीत, कविता पाठ तथा आकर्षक परिधानों और हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना
इस मौके पर बोलते हुए राजदूत अखिलेश मिश्र ने आयरलैंड में उत्तर प्रदेश के छोटे लेकिन सक्रिय डायस्पोरा का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भारतीय दूतावास की गतिविधियों और कार्यक्रमों में प्रवासी समुदाय की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की। साथ ही IT, फार्मा, फाइनेंस और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में UP के प्रोफेशनल्स द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया।
उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और नए अवसर
राजदूत मिश्र ने पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश न केवल भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी तेज़ी से आगे बढ़ा है। इसके साथ ही यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हो रहा विकास आयरलैंड के लिए व्यापार, निवेश, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्रों में अनेक अवसर पैदा कर रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने आयरलैंड में रह रहे UP के प्रतिनिधियों से दोनों देशों के बीच सेतु बनकर द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया।
गणतंत्र दिवस का संदेश
कार्यक्रम के अंत में राजदूत मिश्र ने समुदाय को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि गणतंत्र दिवस मनाने की सार्थकता तभी है जब हम सभी भारतीय संविधान के मूल्यों और आदर्शों के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करें। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हमारे प्रजातंत्र का आधार है और हमारे अधिकारों का स्रोत भी। अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे से जुड़े हैं—अधिकार तभी सुरक्षित रह सकते हैं जब समाज का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे।
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