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15 दिसंबर से लागू होगा सोशल मीडिया वेटिंग सिस्टम

15 दिसंबर से लागू होगा अमेरिकी सरकार का नया 'सोशल मीडिया वेटिंग सिस्टम'

अमेरिकी सरकार वीजा से संबंधित नियमों को लगातार सख्त करती जा रही है। इससे अमेरिका जाने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए एक नया संकट पैदा हो गया है।

15 दिसंबर से लागू होगा अमेरिकी सरकार का नया सोशल मीडिया वेटिंग सिस्टम

US government's new social media vetting system will come into effect on December 15 |

वॉशिंगटन: अमेरिकी सरकार वीजा से संबंधित नियमों को लगातार सख्त करती जा रही है। इससे अमेरिका जाने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए एक नया संकट पैदा हो गया है। ट्रम्प सरकार के इमिग्रेशन नीतियों में किए गए इस तरह के बदलाव से भारतीयों की परेशानी और बढ़ गई है।

15 दिसंबर से लागू होगा नया 'सोशल मीडिया वेटिंग सिस्टम'

अमेरिकी सरकार द्वारा 15 दिसंबर 2025 से नया 'सोशल मीडिया वेटिंग सिस्टम' लागू किया जा रहा है। इस नियम के मुताबिक H-1B और H-4 वीजा के आवेदकों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करना होगा। ऐसा नहीं करने की स्थिति में कॉन्सुलेट वीजा अपॉइंटमेंट रद्द कर रहे हैं। ऐसे में पढ़ाई, नौकरी या किसी अन्य कारणों से अमेरिका जाने वाले लोगों का प्लान खतरे में पड़ गया है। 

इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप्स, एक्स, लिंक्डइन और फेसबुक पर एक तरह की डिजिटल भगदड़ मच गई है। लोग तरह-तरह के सवाल करने लगें कि क्या वे वापस अमेरिका जा पाएंगे, इंटरव्यू सिर्फ एक सप्ताह बाद था, अब क्या करें?, क्या कोई एमर्जेंसी अपॉइंटमेंट संभव है? सवाल इतने थे कि जवाब कम पड़ने लगे। हर घंटे नए अनुभव, नए स्क्रीनशॉट, नए ईमेल, लोगों की नई-नई मुश्किलें सामने आने लगीं। 

अमेरिकी दूतावासों ने जारी किया बयान

अमेरिकी दूतावासों की ओर से जारी बयान में साफ लिखा गया कि, "यदि आपको एक ईमेल प्राप्त हुआ है जिसमें कहा गया है कि आपकी वीज़ा अपॉइंटमेंट पुनर्निर्धारित (rescheduled) कर दी गई है, तो मिशन इंडिया आपकी नई अपॉइंटमेंट तिथि पर आपकी सहायता करने के लिए तत्पर है। आपकी पहले से निर्धारित अपॉइंटमेंट तिथि पर आने से आपको वाणिज्य दूतावास (Consulate) में प्रवेश से वंचित कर दिया जाएगा।"

इस संदेश से स्पष्ट हो रहा है कि जो तारीख सिस्टम में नई दिखाई दे रही है, वही वैध है। यदि किसी ने दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 की अपॉइंटमेंट बुक की थी, तो उसे अब मार्च 2026 की तारीख का ही इंतज़ार करना होगा। ऐसे में लोगों के लिए एक बेहद कठिन स्थिति पैदा हो गई है, क्योंकि हजारों लोग ऐसे थे जिन्होंने अपनी छुट्टियाँ, यात्रा योजनाएँ, फ्लाइट टिकट, होटल बुकिंग, फैमिली शेड्यूल और यहां तक कि अपने बच्चों की स्कूल टाइमिंग भी इसी वीज़ा अपॉइंटमेंट के अनुसार प्लान की थी।

क्या है सोशल मीडिया वेटिंग

दरअसल, अमेरिका ने पिछले कुछ सालों से सोशल मीडिया को सिर्फ एक मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि सुरक्षा, इंटेलिजेंस और जोखिम आकलन का एक बेहद महत्वपूर्ण टूल मानना शुरू कर दिया है। वर्ष 2019 में भी अमेरिका ने कुछ वीज़ा कैटेगरी के आवेदकों से अनिवार्य रूप से सोशल मीडिया हैंडल की जानकारी माँगनी शुरू कर दी थी। लेकिन जो नियम 2025 में लागू होना है, वह इस नीति को कई गुना आगे ले जाता है। अब सिर्फ सोशल मीडिया हैंडल देने से काम नहीं चलेगा- अमेरिका अब लोगों के पिछले वर्षों की पोस्ट, राजनीतिक विचार, संवेदनशील मुद्दों पर उनकी राय, दूसरे देशों पर की गई टिप्पणियाँ, विवादित पोस्ट्स पर आपकी प्रतिक्रियाएँ, किन लोगों को फॉलो किया, किन समुदायों से इंटरैक्ट करते हैं, क्या कभी अमेरिकी सरकार, अमेरिकी सेना या अमेरिकी विदेश नीति के खिलाफ कुछ लिखा- इन सभी की जांच करेगा।

पूरा डेटा एनालिटिक्स सिस्टम करेगा लोगों के प्रोफाइल की जांच

इस जांच में सिर्फ एक अधिकारी आपकी प्रोफ़ाइल नहीं देखेगा, बल्कि पूरा एक डेटा एनालिटिक्स सिस्टम इसमें शामिल होगा। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में AI, मशीन लर्निंग, साइबर इंटेलिजेंस, पैटर्न रिकग्निशन और मानव समीक्षा सभी शामिल होंगी। जाहिर है, यह प्रक्रिया बेहद भारी, समय लेने वाली और विशाल डेटा पर आधारित होगी। भारत जैसे देश से जहां लाखों अमेरिकी वीज़ा आवेदन हर साल आते हैं, इस डेटा को विश्लेषित करना अपने आप में एक बड़ा प्रोजेक्ट है। यही कारण है कि अमेरिकी वीज़ा सिस्टम ने अपनी अपॉइंटमेंट्स को बहुत आगे बढ़ाकर खुद को समय देने की कोशिश की है।

H-1B वीज़ा पर निर्भर लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा प्रभाव

इस फैसले का सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लगा है जो H-1B वीज़ा पर निर्भर हैं, क्योंकि यह पूरा सिस्टम सबसे पहले इन्हीं पर असर डालता दिख रहा है। H-1B वीज़ा एक नॉन-इमीग्रेंट वर्क वीज़ा होता है, जो अमेरिकी कंपनियों द्वारा उन विदेशी प्रोफेशनल्स को दिया जाता है जो इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, मेडिकल, फाइनेंस, रिसर्च, टेक्नोलॉजी और अन्य स्पेशलाइज्ड क्षेत्रों में काम करते हैं। H-1B धारक सालों तक अमेरिका में काम करते हैं, लेकिन हर कुछ वर्षों में उन्हें भारत आकर वीज़ा स्टैंपिंग करानी होती है। यही वह स्टेप है जो उनके लिए प्रवेश का द्वार खोलता है - बिना स्टैंपिंग के वे अमेरिका लौट नहीं सकते।

लोगों ने साझा किए अपने-अपने अनुभव

सोशल मीडिया पर कई H-1B आवेदकों ने लिखा कि वे सिर्फ स्टैंपिंग के लिए भारत आए थे और उनका घर, परिवार, स्कूलिंग, मेडिकल इंश्योरेंस, टैक्स सिस्टम और नौकरी - सब कुछ अमेरिका में सेट है। लेकिन वीज़ा स्टैंपिंग के बिना एक दिन भी लौटना संभव नहीं। वहीं कुछ लोगों ने तो यह भी साझा किया कि उनका बायोमेट्रिक्स पूरा होने के कुछ घंटों बाद ही इंटरव्यू कैंसिल कर दिया गया। एक व्यक्ति ने चेन्नई कांसुलेट का अनुभव साझा करते हुए लिखा - "सुबह बायोमेट्रिक्स दिया और दोपहर में ईमेल आया कि आपकी इंटरव्यू डेट अब 2026 की है। मैंने अपनी सारी तैयारी उसी हफ्ते के लिए की थी।" ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जिससे लोगों में डर और अनिश्चितता बढ़ गई।

पूरी तरह रोजगार पर निर्भर होता है H-1B वीज़ा

अमेरिका में काम करने वाले लोग यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि H-1B वीज़ा पूरी तरह रोजगार पर निर्भर होता है। नौकरी जाते ही वीज़ा भी खतरे में आ जाता है। इन घटनाओं ने भारत-अमेरिका ट्रैवल, बिज़नेस, टेक सेक्टर, शिक्षा, रिसर्च और फैमिली मूवमेंट पर भी गहरा असर डाला है। लाखों भारतीय हर साल वर्क वीज़ा, स्टूडेंट वीज़ा, टूरिस्ट वीज़ा, रिसर्च वीज़ा और बिज़नेस वीज़ा के लिए आवेदन करते हैं। इन कैटेगरी में पहले से ही वेट टाइम बहुत ज्यादा था - कई जगह यह 300 - 400 दिनों तक पहुंच चुका था। अब नए सोशल मीडिया वेटिंग सिस्टम के चलते यह वेट टाइम और बढ़ सकता है।

भविष्य में और भी कड़े और विस्तृत हो सकते हैं नए नियम

कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है - यह नया नियम भविष्य में और भी कड़े और विस्तृत हो सकते हैं, जिससे वीज़ा प्रोसेसिंग टाइम कई गुना बढ़ सकता है। विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि अगर सोशल मीडिया वेटिंग में किसी की कोई पुरानी पोस्ट रेड फ्लैग दिखा देती है, तो उसका वीज़ा बिना इंटरव्यू के भी रिजेक्ट किया जा सकता है। यही कारण है कि लोग अपनी पुरानी पोस्ट्स डिलीट कर रहे हैं, सोशल मीडिया अकाउंट्स लॉक कर रहे हैं, प्रोफाइल प्राइवेट कर रहे हैं और कई लोग तो अपने अकाउंट्स को पूरी तरह डीएक्टिवेट कर रहे हैं।

अमेरिकी वीज़ा सिस्टम में बदलाव से लाखों परिवारों, कर्मचारियों पर पड़ेगा असर

अमेरिकी वीज़ा सिस्टम में यह बदलाव सिर्फ एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं है—इसका सीधे असर लाखों परिवारों, कर्मचारियों, कंपनियों और दोनों देशों के बीच ट्रैवल और बिज़नेस रिलेशन पर पड़ेगा। सोशल मीडिया वेटिंग सुरक्षा के लिहाज से भले ही मजबूत कदम हो, लेकिन इसकी कीमत उन लोगों को चुकानी पड़ रही है जिनके करियर, सपने और भविष्य इस वीज़ा सिस्टम पर टिका हुआ है।

दूतावासों की ओर से अभी तक जारी नहीं हुए कोई दिशानिर्देश

अभी तक दूतावासों की ओर से कोई विस्तृत दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं, जिससे यह तय करना बेहद कठिन हो गया है कि आगे क्या होगा, कब होगा, और किस प्रकार होगा। लोगों को केवल यही सलाह दी जा सकती है कि वे अपने HR, मैनेजर्स और इमीग्रेशन वकीलों से लगातार संपर्क में रहें। आने वाला समय शायद और भी कठिन हो, क्योंकि लाखों आवेदन एक साथ जांच के लिए लंबित रहेंगे।

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