एयर इंडिया AI171 विमान हादसे के पीड़ित परिवारों की ओर से लड़ रहे वकील माइक एंड्रयूज़ ने सोमवार को मुआवज़े में देरी, परिवारों की मानसिक परेशानी और जांच में उठ रहे तकनीकी सवालों को गंभीर चिंता जताई है।
अहमदाबाद। एयर इंडिया AI171 विमान हादसे के पीड़ित परिवारों की ओर से लड़ रहे अमेरिकी वकील माइक एंड्रयूज़ ने सोमवार को मुआवज़े में देरी, परिवारों की मानसिक परेशानी और जांच में उठ रहे तकनीकी सवालों को गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अब तक इस दुर्घटना से प्रभावित 130 से ज़्यादा परिवार संयुक्त कानूनी कार्रवाई में शामिल हो चुके हैं और हादसे की वजह की जांच अभी भी जारी है।
परिवारों की स्थिति पर चिंता
वकील एंड्रयूज़ ने कहा कि इन परिवारों के लिए हर दिन बेहद मुश्किल भरा है, ये एक नए जीवन को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। आर्थिक नुकसान तो साफ दिखता है, लेकिन मानसिक चोट और लंबे समय का मनोवैज्ञानिक असर अभी भी नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। उन्होंने ब्रिटेन का एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक परिवार जिसने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया, उसे आर्थिक मजबूरी में घर बदलना पड़ा और तीन बच्चों को पढ़ाई छोड़कर काम करना पड़ा।
जांच में तकनीकी सवाल
एंड्रयूज़ के अनुसार उनकी कानूनी टीम फ्लाइट डेटा, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और अन्य तकनीकी सबूतों की जांच एयरलाइन विशेषज्ञों की मदद से करा रही है। उन्होंने आगे कहाा कि दुर्घटना से पहले विमान में इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी और लाइट flicker होने की जानकारी मिली थी। आपातकालीन पावर सिस्टम सक्रिय हुआ था और Ram Air Turbine (RAT) तैनात हुई थी, जिससे इशारा मिलता है कि शायद कोई बड़ा इलेक्ट्रिकल या हाइड्रोलिक फेल्योर हुआ था। टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में पानी का रिसाव हुआ था, जिससे सिस्टम फेल हुआ।
अंतरराष्ट्रीय जांच सहयोग
वकील ने कहा कि उन्हें इस बात में दिलचस्पी है कि भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की टीम जल्द ही वॉशिंगटन डीसी जाकर NTSB अधिकारियों से मिलने वाली है। उन्होंने कहा कि ऐसा होना इस बात का संकेत है कि जांच में अब तक जो जानकारी मिली है, वह काफी महत्वपूर्ण है।
मुआवज़े में देरी और दस्तावेज़ी समस्याएँ
एंड्रयूज़ ने बताया कि भारत और यूके दौरे के दौरान उनकी टीम ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, जहां परिवारों ने मुआवज़े, कागजी कार्रवाई और निजी सामान वापस मिलने में देरी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि अब तक बहुत कम परिवारों को घोषित एक करोड़ रुपये की अंतरिम सहायता मिली है, और देरी का कारण दस्तावेज़ी प्रक्रियाएं और सरकारी औपचारिकताएँ बताई जा रही हैं।
कानूनी दस्तावेज़ों पर चेतावनी
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ परिवारों को ऐसे दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जा रहा है, जिनसे भविष्य में बोइंग, GE या अन्य कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। उन्होंने इसे अनुचित और जल्दबाज़ी में उठाया गया कदम बताया और परिवारों से कहा है कि जब तक जांच पूरी न हो जाए, वे ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें।
निजी सामान की वापसी
उन्होंने बताया कि जो सामान पहचान योग्य है उसे जल्द लौटाया जा सकता है, जबकि बाकी सामान की पहचान में अधिक समय लग सकता है। आमतौर पर एयरलाइन ऐसी प्रक्रिया के लिए निजी एजेंसियों की मदद लेती है। एंड्रयूज़ ने कहा कि एयर इंडिया को इस मुश्किल समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा रहना चाहिए।
गौरतलब हो कि यह हादसा 12 जून को हुआ था, जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी। इस दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हुई थी जिसमें 229 यात्री, 12 क्रू सदस्य और 19 ज़मीनी लोग शामिल थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान भरने के 90 सेकंड के भीतर विमान के दोनों इंजन बंद हो गए थे जिससे विमान तेजी से नीचे गिरा था। यह हादसा भारत के इतिहास में सबसे भयानक विमान हादसों में से एक माना जा रहा है।
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