अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाये गये पचास फीसदी टैरिफ के बावजूद केन्द्र सरकार निर्यात में वृद्धि का दावा कर रही है। इसके विपरीत तमिलनाडु में निर्यातक संकट में हैं।
चेन्नई/दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाये गये पचास फीसदी टैरिफ के बावजूद केन्द्र सरकार निर्यात में वृद्धि का दावा कर रही है। इसके विपरीत तमिलनाडु में निर्यातक संकट में हैं। एक्सपोर्ट यूनिट्स बंद हो रही हैं और कामगार बेरोजगार हो रहे हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस ट्रेड संकट के तुरंत समाधान की मांग की है। मोदी सरकार में साझीदार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि अमेरिका के ऊंचे टैरिफ से राज्य के झींगा निर्यात को कितना नुकसान हो रहा है।
केंद्र सरकार का दावा: वस्त्र निर्यात में लगातार बढ़ोतरी
केन्द्र सरकार का दावा है कि भारत का हस्तशिल्प वस्त्र और परिधान निर्यात पिछले चार वित्तीय वर्षों में 4.6 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ बढ़ा है। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने बीते दिनों संसद में यह जानकारी दी थी। केंद्रीय मंत्री ने संसद में कहा था कि वित्त वर्ष 2020-21 में जहां देश का वस्त्र निर्यात 31.58 अरब डॉलर था, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 तक यह बढ़कर 37.75 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान 100 से अधिक देशों में भारतीय वस्त्रों का निर्यात बढ़ा है।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के निर्यातकों का दर्द उजागर किया है। एम. के. स्टालिन ने गुरुवार को पीएम मोदी को लिखे एक पत्र में कहा कि कुछ जिलों में एक्सपोर्ट ऑर्डर खत्म हो गए हैं, जिससे रोजाना 600 मिलियन रुपये (6.7 मिलियन डॉलर) के रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है। तिरुपुर जिले में, जिसे देश की निटवियर कैपिटल के नाम से भी जाना जाता है, वहां कन्फर्म ऑर्डर में 150 अरब रुपये का भारी नुकसान हुआ है, जिससे प्रोडक्शन में 30 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ी है। तिरुपुर, कोयंबटूर, ईरोड और करूर जैसे औद्योगिक जिलों में निर्यातकों को रोजाना 60 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। राज्य का कपड़ा और लेदर सेक्टर इस आर्थिक चोट से सबसे ज्यादा बेहाल है।
निर्यात संकट से खतरे में 85 लाख श्रमिकों की रोज़ी-रोटी
तमिलनाडु में इन एक्सपोर्ट उद्योगों से जुड़े 85 लाख श्रमिकों के सामने अब रोजी रोटी और वेतन का संकट खड़ा हो गया है। कई छोटे और मझोले उद्योग (एमएसएमई) बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्टालिन ने आगाह किया है कि यह केवल व्यापारिक घाटा नहीं, बल्कि एक बड़ा मानवीय संकट है, जिसे समय रहते टालना जरूरी है।
अमेरिकी टैरिफ से तिरुपुर समेत औद्योगिक क्लस्टरों को भारी झटका
तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी टैरिफ के कारण अकेले तिरुपुर के निटवेयर हब से 15 हजार करोड़ रुपए के कन्फर्म ऑर्डर रद्द हो गए हैं। कई यूनिट्स में उत्पादन 30% तक घट गया है। इसी तरह वेल्लोर, रानीपेट और तिरुपत्तूर के फुटवियर क्लस्टर में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। अमेरिका द्वारा देश पर थोपे गये भारी आयात शुल्क के कारण भारतीय निर्यातकों का मुनाफा पूरी तरह खत्म हो गया है। वे ग्राहकों को रोकने के लिए डिस्काउंट देने को मजबूर हैं। वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देश भारत के ग्राहकों को खींच रहे हैं। एक बार ऑर्डर दूसरे देश जाने के बाद उन्हें वापस पाना निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ से भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता फंसी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है, जो दुनिया की सबसे ज्यादा दरों में से एक है। इससे भारत के सबसे बड़े बाजार में एक्सपोर्ट कम हो गया है। महीनों की बातचीत और नई दिल्ली के अधिकारियों के जल्द ही डील होने की उम्मीद जताने के बावजूद, दोनों पक्ष बातचीत में फंसे हुए हैं और इस बात का कोई साफ संकेत नहीं है कि टैरिफ कम किए जाएंगे या नहीं। हालांकि केन्द्र सरकार की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि ट्रेड डील को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है और जल्द ही एग्रीमेंट हो सकता है।
देश के निर्यात में तमिलनाडु की भूमिका अहम
स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु देश के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 28 फीसदी का योगदान देता है और इस सेक्टर में लगभग 7.5 मिलियन लोगों को रोजगार देता है। उन्होंने कहा कि राज्य की लेदर और फुटवियर इंडस्ट्री देश के सेक्टरल एक्सपोर्ट में 40 फीसदी का योगदान देती है और 10 लाख से ज्यादा मजदूरों को रोजगार देती है। तमिलनाडु, भारत के टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़े और जूते-चप्पल, और ऑटोमोबाइल के सबसे बड़े एक्सपोर्टिंग हब में से एक है। देश का सबसे अधिक औद्योगीकृत राज्य होने के नाते, यह वियतनाम और मैक्सिको के साथ मुकाबला करता है। यहां Apple Inc. की फैक्ट्रियां भी हैं। लेकिन मोबाइल फोन के एक्सपोर्ट पर फिलहाल ट्रंप के टैरिफ से छूट मिली हुई है।
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