मालेगांव ब्लास्ट पर NIA कोर्ट के आदेश के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने दायर की याचिका.फैसले को लेकर असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए इंसाफ की मांग की..
नकुल जैन, नोएडा
मालेगांव ब्लास्ट के आरोपियों को क्लीन चिट मिलने के बाद पीड़ित पक्ष की तरफ से मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है..पीड़ित पक्ष ने वकील के माध्यम से दलील दी है कि, एनआई कोर्ट की तरफ से दिया गया फैसला पूरी तरह से बेबुनियाद है..कोर्ट का सातों आरोपियों का बरी करना कानून के दृष्टिकोण से त्रुटिपूर्ण है..पीड़ित पक्ष के वकील ने याचिका में एनआई कोर्ट के फैसले को रद्द करने की भी मांग की है.. वैसे आपको बता दें कि 31 जुलाई 2025 को एनआई की विशेष अदालत ने मालेगांव ब्लास्ट के सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था...जिसके बाद से ही लगातार पीड़ित पक्ष फैसले को लेकर असंतुष्टि जाहिर कर रहा था..और इसलिए अब उसने इंसाफ के लिए मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है...
कब और कैसे हुआ था मालेगांव ब्लास्ट...
महाराष्ट्र के नासिक जिले का कस्बा मालेगांव साल 2008 में बम धमाके से कांप उठ था.. वहीं धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी.. साथ ही 101 लोग घायल हुए थे..... बम धमाका मस्जिद के पास एक मोटर साइकिल पर विस्फोटक बांधकर किया गया था..जिसके बाद समुदाय विशेष को निशाना बनाकर धमाका करने की बात भी सामने आई थी..साथ ही इस पूरे मामले को लेकर सात लोगों को भी आरोपी बनाया गया था..जिसमें मशहूर साध्वी और बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा का नाम भी सामने आया था...जिसके चलते उस दौरान उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी...
मालेगांव ब्लास्ट को लेकर एनआईए कोर्ट ने क्या तर्क दिए
मालेगांव ब्लास्ट को लेकर पिछले कई सालों से अदालत में मामला चल रहा था..जिसमें एनआईए की विशेष अदालत ने 31 जुलाई को पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया था..कोर्ट ने कहा था कि सबूतों के अभाव में किसी भी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं किया जा सकता..अदालत की तरफ से ये भी कहा गया था कि यदि कोई व्यक्ति ने अपराध भी किया हो तो भी सबूतों के अभाव में उसे भी लाभ दिया जाता है..इसलिए फिलहाल आरोपियों के खिलाफ ऐसे कोई भी पुख्ता सबूत सामने नहीं आए हैं कि, जिससे साबित हो कि इन लोगों ने ही बम धमाके करवाए थे..जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सभी को बरी कर दिया था..
पीडित पक्ष ने फैसले के बाद किया हाईकोर्ट का रुख
जुलाई 2025 में एनआई कोर्ट ने सभी सातों आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया था..जिसके बाद जहां एक तरफ आरोपी पक्ष ने फैसले को लेकर खुशी जाहिर की थी..तो वहीं दूसरी तरफ पीड़ित पक्ष ने असंतुष्टि जताई थी..साथ ही पीड़ित पक्ष ने फैसले को इंसाफ के लिहाज से अन्यायपूर्ण भी बताया था..जिसके बाद फैसले को लेकर उनका विरोध सिर्फ जुबानी ही नहीं ब्लकि कोर्ट तक पहुंच गया है..क्यों कि पीड़ित पक्ष की तरफ से पांच लोगों ने मुंबई हाईकोर्ट में फैसले को रद्द करने को लेकर याचिका दायर की है.. और कोर्ट के आदेश को गलत और कानूनी दृष्टिकोण से त्रुटिपूर्ण भी बताया है.. वही उन्होंने हाईकोर्ट से पिछले आदेशों को रद्द करके आरोपियों के खिलाफ फिर से केस चलाने की मांग भी की है..