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इक्रा ने घटाया ग्रोथ का अनुमान

खाड़ी संकट के कारण यात्री वाहन उद्योग की वृद्धि दर में भारी गिरावट की आशंका

पश्चिम एशिया के तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नाकेबंदी से उपजे तेल संकट का भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ता नजर आ रहा है।

खाड़ी संकट के कारण यात्री वाहन उद्योग की वृद्धि दर में भारी गिरावट की आशंका

West Asia Crisis Slows India Auto Growth |

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नाकेबंदी से उपजे तेल संकट का भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ता नजर आ रहा है। यात्री वाहन की मांग में स्थिरता के बावजूद भारत में ऑटोमोबाइल की वृद्धि दर में चालू वित्त वर्ष में भारी गिरावट का अंदेशा है। रेटिंग एजेंसी "इक्रा" ने अपनी रिपोर्ट में यह आकलन प्रस्तुत किया है। यात्री वाहनों (PV) की मांग में स्थिरता के बावजूद, ऊंचे आधार (high base) और कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण, इक्रा ने वित्त वर्ष 2026-27 में ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए केवल 3-6% की मध्यम वृद्धि का अनुमान लगाया है।

उत्पादन और निर्यात पर दिख सकता है असर

"इक्रा" की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव की वजह से मांग स्थिर बने रहने के बावजूद देश के यात्री वाहन उद्योग की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष 2026-27 में घटकर 4-6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026 में यह वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण गैस की आपूर्ति में बाधा आ रही है। इससे मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियों की उत्पादन लाइनों पर असर पड़ने की संभावना है। भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण निर्यात मात्रा में भी कमी की आशंका है, खासकर उन कंपनियों के लिए जिनकी मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में अधिक हिस्सेदारी है।

नए माडल लॉन्च से मांग को समर्थन मिलने की संभावना

रेटिंग एजेंसी "इक्रा" ने एक रिपोर्ट में कहा कि यात्री वाहन की वृद्धि पर नजर रखने के लिए कमजोर मॉनसून परिदृश्य और पश्चिम एशिया संकट जैसे कारक पर नजर रखनी होंगी। जीएसटी दरों में कटौती और वाहन कंपनियों द्वारा नए माडल लॉन्च करने से मांग को समर्थन मिलने की संभावना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2026 में थोक बिक्री साल-दर-साल 16 प्रतिशत बढ़कर 4.4 लाख यूनिट हो गई, जबकि खुदरा बिक्री 21 प्रतिशत बढ़ी। इसी तरह बीते वित्त वर्ष 2025-26 में थोक बिक्री 8.6 प्रतिशत बढ़कर 47 लाख इकाई के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई, जबकि खुदरा बिक्री 11 प्रतिशत बढ़कर 46 इकाई यूनिट हो गई।

तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ेगा आयात बिल

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण, ब्रेंट क्रूड $115 प्रति बैरल और WTI $105 के पार पहुंच गया है, जिससे कच्चे तेल के आयात बिल में सालाना $56-64 अरब डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है। पश्चिम एशिया में लगातार तनाव और तेल की बढ़ती कीमतें भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह ऑटोमोबाइल सेक्टर की रिकवरी की गति को धीमा कर सकती है।

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