Mahatma Gandhi : महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में याद किया जाता है, लेकिन उनकी यह यात्रा केवल उनके अकेले प्रयासों का नतीजा नहीं थी.
क्या जानते हैं उन 5 प्रमुख महिलाओं के बारे में? जिन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों और आंदोलन को आगे बढ़ाया |
Mahatma Gandhi : महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में याद किया जाता है, लेकिन उनकी यह यात्रा केवल उनके अकेले प्रयासों का नतीजा नहीं थी। उनके जीवन और संघर्ष में कई महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई। ये महिलाएं सिर्फ सहयोगी नहीं थीं, बल्कि गांधीजी की विचारधारा, आंदोलन और सामाजिक कार्यों में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलीं। गांधीजी हमेशा मानते थे कि स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के समान महत्वपूर्ण है।
उन्होंने साबित किया कि यह आंदोलन केवल पुरुषों के बल पर नहीं, बल्कि महिलाओं के त्याग और साहस से भी सशक्त हुआ। गांधीजी और उनकी महिला सहयोगियों का यह संबंध आज भी भारत के इतिहास में प्रेरणा का स्रोत है। हम आपको बताएंगे वो कौनसी 5 प्रमुख महिलाएँ है, लेकिन उससे पहले थोड़ा जानते है गांधी जी का असली नाम क्या है? 13 साल की उम्र में शादी, 19 साल में इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई, और साउथ अफ्रीका में भेदभाव का सामना—कैसे बनी यह यात्रा गांधी जी के सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों की नींव? नेताजी ने उन्हें पहली बार ‘राष्ट्रपिता’ कहा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज़ादी के सिर्फ 5 महीने बाद, 30 जनवरी 1948 को उनका जीवन हमेशा के लिए समाप्त हो गया?
गांधी जी का जीवन परिचय
जिन्हें पूरी दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है, उनका असली नाम था, मोहनदास करमचंद गांधी है। गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी, एक दीवान, और माता पुतलीबाई गांधी थीं। अचानक ही जिंदगी ने उनके लिए एक मोड़ लिया—केवल 13 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई, उनकी जीवनसाथी बनी कस्तूरबा गांधी।
शिक्षा के सफर की बात करें तो गांधी जी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पोरबंदर और राजकोट में पूरी की और फिर 19 साल की उम्र में कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड रवाना हुए, जहाँ उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से वकालत की डिग्री हासिल की।
दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी का संघर्ष
गांधी जी बैरिस्टर बनकर 1893 में एक कानूनी मामले के लिए साउथ अफ्रीका गए थे। लेकिन वहाँ उन्हें नस्लभेदी टिप्पणियों और भेदभाव का सामना करना पड़ा, जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय को उनके रंग रूप के कारण संघर्ष करता देख उनकी लड़ाई लड़ने का फैसला किया। यही उनके जीवन का वो मोड़ था जब गांधी जी की सत्याग्रह की विचारधारा का जन्म हुआ।
गांधी जी की विचारधारा
महात्मा गांधी ने अपना जीवन सत्य, अहिंसा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय जैसे महान सिद्धांतों पर आधारित किया। उनका मानना था कि हिंसा कभी समाधान नहीं हो सकती, इसलिए उन्होंने जीवन भर शांतिपूर्ण संघर्ष के जरिए बदलाव लाने की कोशिश की। गांधी जी का विश्वास था कि सच सबसे बड़ी शक्ति है, और उन्होंने कहा, सत्य ही ईश्वर है। उन्होंने भारतीयों को स्वदेशी वस्त्रों और उत्पादों का उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया, जिसके लिए उन्होंने खादी और चरखा को बढ़ावा दिया। इसके साथ ही, गांधी जी सर्वधर्म समभाव के प्रबल समर्थक थे और मानते थे कि सभी धर्मों का उद्देश्य मानव कल्याण है। उनका जीवन आज भी हमें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
गांधी जी को राष्ट्रपिता किसने कहा
6 जुलाई 1944 को सिंगापुर में एक रेडियो मैसेज देते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी को पहली बार देश का पिता (राष्ट्रपिता) कहकर संबोधित किया था। आगे चलकर भारत सरकार ने इस नाम को मान्यता दी। हालांकि गांधी जी को बापू इससे बहुत पहले से कहा जाता था।1917 में चंपारण सत्याग्रह के दौरान एक किसान ने उन्हें बापू (पिता) कहकर संबोधित किया था।
गांधी जी की मृत्यु
भारत को आज़ादी मिले केवल 5 महीने बाद, 30 जनवरी 1948 को एक दुखद घटना ने पूरी दुनिया को हिला दिया। दिल्ली में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। गांधी जी का निधन सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक अपूरणीय क्षति और गहरा शोक लेकर आया। आइए अब जानते हैं उन 5 प्रमुख महिलाओं के बारे में, जिन्होंने गांधीजी के आदर्शों और आंदोलन को आगे बढ़ाया।