मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और क्रूड आयल में तेजी के बीच देश में दाल,आलू, मछली जैसे खाद्य पदार्थों व अन्य वस्तुओं के दाम में तेजी से थोक मूल्य सूचकांक फरवरी में बढ़कर 2.13 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया।
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और क्रूड आयल में तेजी के बीच देश में दाल, आलू, मछली जैसे खाद्य पदार्थों व अन्य वस्तुओं के दाम में तेजी से थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) फरवरी में बढ़कर 2.13 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया। यह 11 महीने का उच्चतम स्तर है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार सब्जियों की कीमतों में मासिक आधार पर कुछ नरमी देखी गई, लेकिन अन्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति को तेज किया।
लगातार चौथे महीने बढ़ी महंगाई
सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह लगातार चौथा महीना है जब थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में तेजी आई है। यह इस साल जनवरी में 1.81 फीसदी और पिछले साल फरवरी में 2.45 फीसदी थी। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि जारी रहती है, तो थोक महंगाई में और तेजी आ सकती है और इसका असर अन्य वस्तुओं पर भी पड़ेगा।
प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई में उछाल
थोक मूल्य आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई फरवरी में 12 महीने के उच्च स्तर 3.27 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पहले प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई जनवरी 2025 में उच्चतम स्तर 4.58 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।
धातुओं और खाद्य पदार्थों की बड़ी भूमिका
"केयर एज रेटिंग्स" की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने बताया, 'प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल और खनिज उत्पादों में विशेष रूप से तांबा, एल्युमीनियम, जस्ता और निकल जैसी बुनियादी धातुओं की दोहरे अंकों की महंगाई के कारण हुई।' आंकड़ों से यह भी पता चला कि खाद्य महंगाई फरवरी में नौ महीनों के उच्चतम स्तर 1.85 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जनवरी में 1.41 प्रतिशत थी। हालांकि ईंधन और बिजली क्षेत्र में जारी अपस्फीति ने विश्व खाद्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) महंगाई में समग्र वृद्धि को आंशिक रूप से संतुलित कर दिया।
रिटेल महंगाई भी बढ़ी
यह वृद्धि खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि के बाद हुई है, जो 2024 के नए आधार वर्ष श्रृंखला के तहत फरवरी में 2.74 प्रतिशत से बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई। खाद्य महंगाई में वृद्धि और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के निरंतर दबाव के कारण खुदरा महंगाई बढ़ी, जबकि उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक फरवरी में 3.47 प्रतिशत पर आंका गया।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी
फलों (3.57 प्रतिशत), दूध (3 प्रतिशत) और अंडे, मांस व मछली (5.36 प्रतिशत) जैसी प्रोटीन युक्त वस्तुओं की बढ़ती महंगाई के साथ-साथ धान (0.34 प्रतिशत) और सब्जियों (4.73 प्रतिशत) की कीमतों में तेजी से इस वृद्धि को और बल मिला है। इसके अलावा फ्यूल और पावर WPI -4.01% से बढ़कर -3.78% पर पहुंच गई, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट WPI 2.86% से बढ़कर 2.92% हो गई, प्राइमरी आर्टिकल्स WPI बढ़कर 3.27% हो गई।
आगे भी बढ़ सकती है महंगाई
विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के आंकड़े भी ज्यादा रहेंगे क्योंकि इस पर क्रूड ऑयल और LPG के ऊंचे भाव का असर दिखेगा। ईरान युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें आमतौर पर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत को बढ़ाती हैं, जिससे रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर असर पड़ता है।
RBI की नजर रिटेल महंगाई पर
रेपो रेट तय करने में RBI होलसेल इंफ्लेशन के बजाय रिटेल इंफ्लेशन को तवज्जो देता है। WPI में नैचरल गैस, पेट्रोलियम और क्रूड ऑयल का वेट 10.4% है। CPI में इनका हिस्सा 4.8% है। इसलिए 100 डॉलर/बैरल से ज्यादा हो चुके कच्चे तेल का असर होलसेल इंफ्लेशन में ज्यादा दिखेगा। इसका असर कारखानों में बनने वाली चीजों की लागत पर पड़ेगा। वह लागत खुदरा बिक्री में ट्रांसफर होगी और रिटेल इंफ्लेशन में असर डालेगी। रिटेल इंफ्लेशन बढ़कर फरवरी में 3.2% हो चुकी है।
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