भारत की सबसे मशहूर महिला पत्रिकाओं में से एक फेमिना मैगज़ीन ने देविता सराफ़ को अपनी बहुप्रतीक्षित 'पावर लिस्ट: द लिगेसी एडिशन' के कवर पर स्टार के तौर पर पेश किया है।
मुंबई (महाराष्ट्र): भारत की सबसे मशहूर महिला पत्रिकाओं में से एक फेमिना मैगज़ीन ने देविता सराफ़ को अपनी बहुप्रतीक्षित 'पावर लिस्ट: द लिगेसी एडिशन' के कवर पर स्टार के तौर पर पेश किया है।
असली ताकत वही, जो अपने सपनों को जीने की प्रेरणा दे
कवर स्टोरी 'पावर सूट्स हर' में देविता सराफ़ को एक ऐसी लीडर के रूप में पेश किया गया है, जिन्होंने ताकत का मतलब पूरी तरह से बदल दिया है। वो सिर्फ बोर्डरूम में नहीं, बल्कि अपने क्रिएटिव हुनर और नारी-सुलभ शालीनता के साथ हर जगह अपनी पहचान बनाती हैं। उनका 'सॉफ्ट पावर' का कॉन्सेप्ट एक नई सोच को जन्म देता है। देविता का मानना है कि लीडरशिप सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत विज़न है। वो अपनी ज़िंदगी को इस तरह जीती हैं कि महत्वाकांक्षा और खुशी एक-दूसरे से अलग नहीं होते। ये एक ऐसी कहानी है, जो हमें सिखाती है कि असली ताकत वो है, जो हमें अपने सपनों को जीने की प्रेरणा देती है।
शालीनता के साथ पावर
देविता बताती हैं कि पावर का मतलब सिर्फ़ टाइटल और ओहदों से नहीं है। ये एक ऐसी खूबी है, जो अनुभवों से बनती है। मैंने USC, लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में पढ़ाई की। इस सफ़र में मैंने अकेले काम करने से लेकर 300 लोगों की टीम बनाने तक का अनुभव लिया। जब मैंने 'डायनामाइट बाय देविता' लॉन्च किया, तो ये सिर्फ़ एक परफ़्यूम नहीं था, बल्कि बिज़नेस करने वाली महिलाओं के लिए एक पहचान थी। मेरी ज्वेलरी डिज़ाइन और 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के लिए लेखन ने मुझे आर्टिस्टिक विज़न दिया, जो मेरे बिज़नेस को मज़बूती देता है। जब मैं 'सॉफ्ट पावर ड्रेसिंग' की बात करती हूं, तो ये भारतीय महिलाओं के लिए एक नया दृष्टिकोण है। ये नारीत्व और अधिकार का मेल है, जो हमें पुरुषों की नकल करने की बजाय अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित करता है। सफलता के साथ-साथ खुशी पाने की बात करना ज़रूरी है। त्याग और बलिदान से हटकर, हमें अपने सपनों का पीछा करना चाहिए। यही असली पावर है। उन्होंने कहा कि ''अगर आप अंदर से, खुद से या अपनी ज़िंदगी से खुश नहीं हैं, तो आप दुनिया पर राज नहीं कर सकते।''
हार्वर्ड से हर्मेस तक
कवर की सबसे खास बात है देविता की साड़ी। ये साड़ी हर्मेस ने तब बनाई थी, जब 2011 में यह ब्रांड भारत में लॉन्च हुआ था। हल्के गुलाबी रंग की यह साड़ी वाकई में अनोखी है, क्योंकि हर्मेस के पास सिर्फ़ एक साड़ी जितना ही कपड़ा था। उस समय, इसे खुद नहीं खरीद सकती थी, तब मैंने अपनी मां से खरीदने की गुज़ारिश की थी और वादा किया था कि इसे किसी खास मौके पर पहनूंगी। और अब, एक दशक बाद, वो खास मौका आ गया है। फेमिना की 'पावर लिस्ट लिगेसी एडिशन' के कवर पर मेरी मौजूदगी। मेरे लिए, यह सच में सब कुछ सही जगह पर आने जैसा है। कभी-कभी, सपने हमारे मन में रहते हैं और हम उनके लिए मेहनत करते हैं, लेकिन सही पल का इंतज़ार भी करना पड़ता है। सब कुछ एक साथ होना बहुत खास होता है।
कौन हैं देविता सराफ
देविता सराफ 'द वू ग्रुप' की फाउंडर, चेयरपर्सन और CEO हैं। 24 साल की उम्र में कैलिफ़ोर्निया और मुंबई में 'वू न्यू प्रोडक्ट डेवलपमेंट लैब' की स्थापना की। उनका सपना था टेक्नोलॉजी में लग्ज़री लाना, और आज 'वू' भारतीय टीवी ब्रांड के रूप में दुनिया में सबसे अधिक बिकने वाला बन चुका है। हमारे पास 1000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू है और 40 लाख से अधिक टेलीविज़न बिक चुके हैं। मैंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ सदर्न कैलिफ़ोर्निया और हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल से पढ़ाई की और 'मेक इन इंडिया' पॉलिसी को प्रधानमंत्री के सामने पेश किया। मेरा मानना है कि बेहतरीन काम और व्यक्तिगत काबिलियत एक-दूसरे के पूरक हैं, और यही सोच मुझे आगे बढ़ाती है।