प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

17 की उम्र से कराएं हार्ट हेल्थ चेकअप

17 साल की उम्र से कराएं हार्ट हेल्थ चेकअप, अचानक मौत का खतरा होगा कम: डॉ. देवी शेट्टी

नारायणा हेल्थ के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. देवी शेट्टी ने भारतीयों से कम उम्र से ही हृदय स्वास्थ्य की नियमित जांच शुरू करने की अपील की है।

17 साल की उम्र से कराएं हार्ट हेल्थ चेकअप अचानक मौत का खतरा होगा कम डॉ देवी शेट्टी

Start Heart Checkups at 17 |

नई दिल्ली: नारायणा हेल्थ के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. देवी शेट्टी ने भारतीयों से कम उम्र से ही हृदय स्वास्थ्य की नियमित जांच शुरू करने की अपील की है। उनका कहना है कि 17 साल की उम्र में रक्त परीक्षण कराकर उच्च कोलेस्ट्रॉल का पता लगाया जा सकता है, जिससे भविष्य में हृदय रोग के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

17 साल की उम्र में कोलेस्ट्रॉल जांच की सलाह

कार्डियोलॉजी सोसायटी ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए डॉ. शेट्टी ने एएनआई से कहा कि 17 वर्ष की उम्र में कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने से जोखिम वाले लोगों की समय रहते पहचान हो सकती है। इससे वे जीवनशैली और खानपान में बदलाव कर स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं।

35-40 की उम्र में नियमित हार्ट स्क्रीनिंग जरूरी

उन्होंने सुझाव दिया कि 35 से 40 वर्ष की आयु के सभी पुरुषों को नियमित हृदय जांच करानी चाहिए, जिसमें हृदय का सीटी स्कैन भी शामिल हो। वहीं जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें 30 वर्ष की उम्र तक इंतजार नहीं करना चाहिए। डॉ. शेट्टी ने कहा कि हृदय रोग के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को 30 वर्ष की उम्र में जांच करानी चाहिए, जबकि मधुमेह के मरीजों को इससे भी पहले हृदय संबंधी मूल्यांकन करवा लेना चाहिए। उन्होंने रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और अन्य हृदय संबंधी मापदंडों की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया।

एडवेंचर स्पोर्ट्स करने वाले युवाओं के लिए भी जरूरी जांच

युवाओं में एडवेंचर और एंड्योरेंस स्पोर्ट्स के बढ़ते चलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे खेलों में भाग लेने वाले किशोरों के लिए भी हृदय संबंधी जांच आवश्यक है। उनके अनुसार, एक घंटे के भीतर होने वाली बुनियादी हार्ट जांच हर साल करानी चाहिए। यदि कार्डियक सीटी स्कैन सामान्य आता है, तो इसे सात से दस साल तक दोहराने की जरूरत नहीं पड़ सकती।

फिट दिखना स्वस्थ दिल की गारंटी नहीं

व्यायाम के दौरान अचानक हृदय गति रुकने से होने वाली मौतों पर डॉ. शेट्टी ने कहा कि ऐसे मामले दुर्लभ हैं, लेकिन अक्सर उनका कारण पहले से मौजूद और अनपहचानी हृदय बीमारी होती है। उन्होंने कहा कि कई लोग केवल फिट महसूस करने के आधार पर खुद को पूरी तरह स्वस्थ मान लेते हैं। उन्होंने कहा, "आपको हृदय की गंभीर समस्या हो सकती है और फिर भी आपको इसका पता नहीं चलेगा।" उनके अनुसार, ट्रेडमिल, मैराथन या सामान्य शारीरिक गतिविधियों के दौरान बेहोश होने जैसी कई घटनाएं समय पर जांच से रोकी जा सकती थीं।

समय रहते जांच से बच सकती है जान

डॉ. शेट्टी ने बताया कि रक्त परीक्षण, ईसीजी और कार्डियक सीटी स्कैन जैसी बुनियादी जांचों से हृदय की रुकावटों का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे मरीजों का इलाज जल्दी शुरू हो सके। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश लोग लक्षण दिखाई देने तक डॉक्टर के पास नहीं जाते, जिससे गंभीर हृदय रोग को रोकने का अवसर हाथ से निकल जाता है।

(एएनआई)

यह भी पढ़े: बद्रीनाथ मंदिर दान विवाद: वित्त नियंत्रक बोले- 'एक कर्मचारी की चूक, समिति की व्यवस्था पर सवाल नहीं'

Related to this topic: