दीपावली सनातन धर्म की तरह कुछ अन्य धर्मों का भी बड़ा त्योहार माना जाता है..जिसके चलते वह लोगों भी अपनी मान्यताओं के अनुसार इस त्यौहार को मनाते हैं..और अपनी खुशी का इजहार करते हैं..
नकुल जैन, नोएडा
दीवाली को सनतान धर्म का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है..पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापिस लौटे थे..उनके आगमन पर लोगों ने खुशी जाहिर की थी..और दीपमाला जलाकर त्योहार की शुरुआत की थी..लेकिन इसके अलावा भी कुछ और मान्यताएं हैं..जिनको लेकर भी दीपावली पर्व मनाने को लेकर दावा किया जाता है..तो आईए जानते हैं.. वो कौन सी और मान्यताएं जिनको लेकर भी दीपावली के महापर्व से जोड़कर देखा जाता है...
भगवान महावीर स्वामी को मिला था मोक्ष
दीपावली सनातन धर्म की तरह ही जैन धर्म का भी बड़ा त्योहार माना जाता है..मान्यताओं के अनुसार जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को इस दिन पावापुरी में मोक्ष की प्राप्ति हुई थी..जिसके चलते जैन धर्म के अनुयायी इसे उनके निर्वाण पर्व के रुप में मनाते हैं..जैन धर्म के लोग इस दिन जैन मंदिर जाकर भगवान महावीर स्वामी को खांड के लड्डू चढ़ाकर पर्व को मनाते हैं..बता दें कि इस दीपावली के दिन जैन लोगों के नए वर्ष की भी शुरूआत होती है...
अमृतसर की हुई थी स्थापना
जैन धर्म के जैसे ही सिक्ख धर्म में भी दीपावली को पावन माना जाता है..और जिसके चलते वे लोग भी इस पर्व को बड़े धूम-धाम के साथ मनाते हैं..इतिहासकारों के अनुसार साल 1577 में सिक्ख धर्म के चौथे अनुयायी गुरु रामदास ने गुरु अमरदास की याद में अमृतसर शहर और एक सरोवर की स्थापना की थी..जिसके बाद सिक्ख धर्म के लोग इसे एक बड़े पर्व के रुप में मनाने लगे..वहीं सिक्ख धर्म में इस त्योहार को लेकर एक और मान्यता भी है कि..सिक्ख धर्म के छठे गुरु गुरु हरगोबिंद सिंह इस दिन मुगलों की कैद से मुक्त किए गए थे..बताया जाता है कैद से निकलते समय उन्होंने 52 कलियों का चोला पहन रखा था..और इसका फायदा उठाते हुए उन्होंने किले में बंद 52 राजाओं को अपने चोले के सहारे बाहर निकाला था..जिसके चलते सिक्ख धर्म में इस पर्व को बंदी छोड़ दिवस के रुप में भी मनाया जाता है..
कपिल वस्तु में हुआ था गौतम बुद्ध का आगमन
बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध वैराग्य लेने के करीब 17 साल बाद दीपावली के ही दिन अपने गृह नगर कपिल वस्तु लौटे थे..उनके आगमन पर नगर वासियों ने खुश होकर दीपमाला जलाकर अपनी खुशी जाहिर की थी और दीपावली मनाई थी..वहीं सम्राट अशोक जो कि बौद्ध धर्म के अनुयायी थे उन्होंने भी इसी दिन अपना दिग्विजय प्रारंभ किया था..जिसके चलते बौद्ध धर्म में भी इस त्यौहार की बहुत ज्यादा मान्यता है..