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खुले मां अन्नपूर्णा के दरबार के कपाट

धनतेरस पर वाराणसी में खुले मां अन्नपूर्णा मंदिर के स्वर्णमयी दरबार के कपाट

धनतेरस के पावन अवसर पर वाराणसी के मां अन्नपूर्णा मंदिर का स्वर्णमयी दरबार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है, जहां भक्त लगातार पांच दिनों तक मां की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।

धनतेरस पर वाराणसी में खुले मां अन्नपूर्णा मंदिर के स्वर्णमयी दरबार के कपाट

धनतेरस पर खुले मां अन्नपूर्णा के दरबार के कपाट |

वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। धर्म और आस्था की नगरी काशी में धनतेरस के अवसर पर मां अन्नपूर्णा मंदिर का स्वर्णमयी दरबार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। शुक्रवार सुबह पांच बजे से भक्तों को मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन होने लगे। मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई थी। देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। मंदिर में पांच दिनों तक स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन होंगे।

विशेष पूजा और आरती के बाद खुले कपाट

धनतेरस पर सुबह चार बजे से मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और मां का श्रृंगार किया गया। अभिजीत मुहूर्त में विशेष पूजन के बाद आरती संपन्न हुई और सुबह पांच बजे आम श्रद्धालुओं के लिए कपाट खोल दिए गए। इस बार निर्धारित समय से एक घंटे पहले ही दर्शन शुरू करा दिए गए। भक्त मां के दर्शन के साथ खजाना और लावा का प्रसाद पाने के लिए भी उत्साहित नजर आए। काशी में मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता। कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ ने मां अन्नपूर्णा से काशी आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पेट भरने का वचन लिया था। मां ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनके दरबार में आने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहेगा। तभी से मां अन्नपूर्णा को काशी में अन्न और भोजन की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने दर्शन और निकासी के लिए अलग-अलग रास्ते तय किए हैं। बांस-बल्ली से बैरिकेडिंग कर गेट नंबर एक स्थित ढूंढी राज मार्ग से प्रवेश की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु अस्थायी सीढ़ियों से होकर मां की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन कर रहे हैं। निकासी कालिका गली की ओर से कराई जा रही है। सुरक्षा के लिए पुलिस और पीएसी तैनात है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी के साथ मेडिकल टीम भी लगाई गई है।

खजाना रखने से समृद्धि की मान्यता

मान्यता है कि मां के दरबार से मिलने वाले खजाने और पुष्प को घर के पूजा स्थल या तिजोरी में रखने से धन-धान्य और यश में वृद्धि होती है। धनतेरस पर मां के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। इसी दिन समुद्र मंथन के बाद भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश के साथ प्रकट होने की मान्यता भी है। इसलिए इस दिन धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है।

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