प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026:

15 जुलाई से शुरू हो रहा है साधना और सिद्धि का महापर्व, गुप्त नवरात्रि

15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी, जिसे साधना, सिद्धि और आध्यात्मिक शक्ति का विशेष महापर्व माना जाता है।

15 जुलाई से शुरू हो रहा है साधना और सिद्धि का महापर्व गुप्त नवरात्रि

Gupta Navratri Begins on July 15, Marking the Festival of Spiritual Practice and Siddhi |

नई दिल्ली,(भारत)। सनातन धर्म में नवरात्रि का महत्व सबसे अधिक आध्यात्मिक माना गया है। आमतौर पर लोग वर्ष में केवल दो बार आने वाली चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में ही जानते हैं, लेकिन इनके अलावा साल में दो बार माघ और आषाढ़ में ‘गुप्त नवरात्रि’ भी आती है।

15 जुलाई 2026 को आरंभ होगी नवरात्रि

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026, दिन बुधवार से होने जा रहा है, जो 24 जुलाई 2026, दिन शुक्रवार को संपन्न होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से आंतरिक साधना, गोपनीय उपासना और तंत्र-मंत्र की सिद्धियों के लिए समर्पित मानी जाती है।

सुबह 05:33 से 10:09 बजे तक होगी घटस्थापना

प्रत्यक्ष नवरात्रि की तरह इसमें भव्य सार्वजनिक पंडाल नहीं बनाए जाते हैं, बल्कि साधक एकांत में रहकर माता की कठिन आराधना करते हैं। किसी भी नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना/घट स्थापना के साथ होती है। इस वर्ष उदया तिथि के अनुसार, 15 जुलाई को घटस्थापना के लिए सुबह 05:33 से 10:09 बजे तक का समय है।  सबसे उत्तम समय सुबह 8 बजकर 2 मिनट पर रहेगा।

दस महाविद्याओं की पूजा का रहस्य

सामान्य नवरात्रि में जहां माता दुर्गा के 'नवदुर्गा' स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में माता की 'दस महाविद्या' स्वरूप की पूजा की जाती है। माता के महाविद्या स्वरूपों की पूजा तंत्र विधि से की जाती है। इस दौरान तंत्र साधक, अघोरी और सन्यासी माता काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला  की अत्यंत गुप्त रूप से साधना करते हैं।

सामान्य दिनों से कई गुना अधिक फल देती है गुप्त नवरात्रि में मंत्र जाप

शास्त्रों के अनुसार, इन नौ दिनों में की जाने वाली मानसिक पूजा और मंत्र जाप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होते हैं। साधक अपनी पूजा और मनोकामनाओं को जितना अधिक गोपनीय रखते हैं, उन्हें उतनी ही जल्दी और बड़ी सफलता प्राप्त होती है।

गृहस्थ लोगों के लिए नियम और विधि

यह सोचना गलत है, कि गुप्त नवरात्रि केवल तांत्रिकों के लिए ही है; सामान्य गृहस्थ लोग भी सुख-समृद्धि की कामना के लिए यह व्रत रख सकते हैं। गृहस्थ साधकों के लिए नियम बेहद सरल हैं। इन नौ दिनों के दौरान 'देवी भागवत' और 'दुर्गा सप्तशती' में बताए नियमों का पालन अनिवार्य होता है, और अपने व्रत को गुप्त रखना होता है।

नवरात्रि के दौरान किए जाने वाले उपाय

प्रतिदिन सुबह-शाम माता के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' मंत्र का जाप करना चाहिए। यदि आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तो गुप्त नवरात्रि के दौरान 'श्री सूक्त' का पाठ करना और जरूरतमंदों को अन्न व वस्त्र दान करना विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है। नवरात्रि में कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है।

यह भी पढ़ेंः नन्हे मेहमान के लिए चुनें सबसे खूबसूरत और अर्थपूर्ण नाम

Related to this topic: