प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

सोमवार चंद्र पूजा की सरल विधि

सोमवार को करें चंद्रदेव की पूजा, जानें अर्घ्य देने की सही विधि और धार्मिक महत्व

सोमवार को चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को जल अर्पित कर ॐ सोमाय नमः का जाप करने की धार्मिक परंपरा है, साथ ही भगवान शिव का स्मरण भी शुभ माना जाता है।

सोमवार को करें चंद्रदेव की पूजा जानें अर्घ्य देने की सही विधि और धार्मिक महत्व

Monday Moon Puja: Know the Right Method, Offerings and Religious Significance | AI Image

नई दिल्ली (भारत)। हिंदू धर्म में सोमवार का संबंध भगवान शिव के साथ-साथ चंद्रदेव से भी माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा को मन, शीतलता, भावनाओं और सौम्यता का प्रतीक माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में भी चंद्रमा को महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। यही वजह है कि सोमवार के दिन कई लोग चंद्रदेव की पूजा और उनसे जुड़े मंत्रों का जाप करते हैं।

मान्यता है कि श्रद्धा के साथ चंद्रदेव की आराधना करने से मन को शांति और भावनात्मक स्थिरता प्राप्त होती है। हालांकि इन धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं को आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

शाम या रात में करें चंद्रदेव का स्मरण

चंद्रमा की पूजा सामान्यतः चंद्रोदय के बाद करने की परंपरा है। सोमवार को स्नान करके दिन में भगवान शिव की पूजा करने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन कर उनकी आराधना की जा सकती है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए एक स्वच्छ पात्र में जल लें। अपनी परंपरा के अनुसार उसमें थोड़ा कच्चा दूध या अक्षत मिला सकते हैं। चंद्रमा की ओर देखकर श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित करें।

चंद्रदेव को अर्घ्य देने की विधि

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल को धीरे-धीरे अर्पित करें। इसके बाद हाथ जोड़कर चंद्रदेव का ध्यान करें। इस दौरान चंद्रमा की ओर सीधे बहुत देर तक न देखें, बल्कि श्रद्धापूर्वक दर्शन कर प्रार्थना करें।

अर्घ्य देते समय यह मंत्र बोला जा सकता है—

"ॐ सोमाय नमः।"

इसके अलावा "ॐ चन्द्राय नमः" मंत्र का भी जाप किया जाता है।

सफेद वस्तुओं का है विशेष महत्व

धार्मिक परंपरा में चंद्रमा को सफेद रंग और शीतलता से जोड़ा गया है। इसलिए चंद्र पूजा में सफेद फूल, अक्षत, दूध, चावल और सफेद मिठाई जैसी वस्तुओं का उपयोग किया जाता है।

भगवान शिव से है चंद्रमा का संबंध

पौराणिक कथाओं में चंद्रदेव का भगवान शिव से विशेष संबंध बताया गया है। भगवान शिव के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है। इसी कारण उन्हें चंद्रशेखर और सोमेश्वर जैसे नामों से भी संबोधित किया जाता है। सोमवार को भगवान शिव की पूजा के साथ चंद्रदेव का स्मरण करना इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा हुआ है।

सोमवार को क्यों की जाती है चंद्र पूजा?

'सोम' भगवान चंद्रमा का एक प्रमुख नाम है। इसी कारण सोमवार को सोम का दिन माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में सोमवार का संबंध चंद्रमा से जोड़ा गया है। ज्योतिषीय मान्यता में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। इसलिए लोग मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मकता की कामना से चंद्रदेव की पूजा करते हैं।

चंद्रमा को ये चीजें कर सकते हैं अर्पित

  • स्वच्छ जल
  • कच्चा दूध
  • अक्षत
  • सफेद फूल
  • सफेद मिठाई
  • चावल

सोमवार को रखें सात्विक आहार

जो लोग सोमवार का व्रत रखते हैं, वे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन कर सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से व्रत के दौरान मन, वाणी और कर्म में संयम रखने को भी महत्व दिया जाता है।

यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है तो कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

चंद्र पूजा के साथ करें भगवान शिव का ध्यान

क्योंकि चंद्रमा का भगवान शिव से गहरा धार्मिक संबंध माना जाता है, इसलिए सोमवार को पहले भगवान शिव का पूजन और फिर रात में चंद्रदेव को अर्घ्य देना भक्तों के लिए विशेष आस्था का विषय होता है।

"ॐ नमः शिवाय" और "ॐ सोमाय नमः" का जाप अपनी श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है।

(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)

यह भी पढ़ेंः सोमवार को ऐसे करें भगवान शिव की पूजा, जानें जलाभिषेक से लेकर आरती तक की सरल विधि

Related to this topic: