ओणम केरल की समृद्ध संस्कृति, प्रकृति, कृषि, परंपराओं और सामुदायिक एकता का उत्सव है, जो राजा महाबली की पौराणिक कथा के लिए खास पहचान रखता है।
नई दिल्ली (भारत)। केरल का प्रमुख पर्व ओणम हर साल चिंगम महीने में मनाया जाता है। यह त्योहार केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि केरल की संस्कृति, कृषि, प्रकृति और सामुदायिक एकता का उत्सव भी है। ओणम के दौरान घरों में फूलों की रंगोली, पारंपरिक भोज, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहती है। ओणम की तिथि मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने में 'थिरुवोनम नक्षत्र' के आधार पर तय होती है।
राजा महाबली से जुड़ी है ओणम की कहानी
पौराणिक मान्यता के अनुसार केरल में कभी राजा महाबली का शासन था। वे दानवीर, न्यायप्रिय और अपनी प्रजा के बीच बेहद लोकप्रिय राजा माने जाते थे। कहा जाता है कि उनके शासन में लोग सुखी और समृद्ध थे। महाबली की बढ़ती प्रतिष्ठा के बाद भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। वामन देव ने राजा महाबली से तीन पग भूमि मांगी। महाबली ने दान देने का वचन दिया। इसके बाद वामन देव ने विराट रूप धारण कर दो पग में पृथ्वी और आकाश नाप लिया। तीसरे पग के लिए महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया। मान्यता है, कि महाबली की भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आने का वरदान दिया। ओणम को इसी अवसर की खुशी के रूप में मनाने की परंपरा बताई जाती है।
फूलों की रंगोली है खास
ओणम की सबसे आकर्षक परंपराओं में पूक्कलम शामिल है। घरों के आंगन में अलग-अलग रंगों के फूलों से सुंदर आकृतियां बनाई जाती हैं। ओणम के दिनों में पूक्कलम को हर दिन नए फूलों से सजाया जाता है और थिरुवोनम के दिन इसे विशेष रूप से भव्य बनाया जाता है।
ओणसद्य का विशेष महत्व
ओणम के अवसर पर बनने वाला पारंपरिक भोज ओणसद्य भी बेहद प्रसिद्ध है। इसे आमतौर पर केले के पत्ते पर परोसा जाता है। इसमें चावल के साथ सांभर, अवियल, थोरन, ओलन, पचड़ी, अचार, पापड़ और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां शामिल होती हैं। ओणसद्य में व्यंजनों की संख्या और प्रकार परिवार तथा क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
नौका दौड़ और सांस्कृतिक कार्यक्रम
ओणम के दौरान केरल में वल्लम कली यानी पारंपरिक नौका दौड़ आयोजित की जाती है। लंबी सर्पाकार नावों में सवार लोग तालमेल के साथ नाव चलाते हैं। यह प्रतियोगिता केरल की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा कथकली, तिरुवातिरा और अन्य पारंपरिक लोककलाओं के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
नए कपड़े पहनने की परंपरा
ओणम पर लोग नए कपड़े पहनते हैं, जिसे कई जगह ओणक्कोडी कहा जाता है। परिवार के लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और मिलकर त्योहार मनाते हैं।
ओणम का संदेश
ओणम को समृद्धि, समानता, भाईचारे और खुशहाली का पर्व माना जाता है। राजा महाबली की कथा लोगों को ऐसे आदर्श शासन की याद दिलाती है, जिसमें प्रजा की खुशी को सबसे अधिक महत्व दिया जाता था। यही वजह है, कि ओणम आज केरल की सीमाओं से बाहर भी उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व धर्म, संस्कृति, प्रकृति और सामाजिक एकता को एक साथ जोड़ने वाली भारत की समृद्ध परंपराओं की झलक पेश करता है।
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