आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी। आज मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाएगी। द्वितीया तिथि रात करीब 10:13 बजे तक रहेगी।
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: द्वितीया — रात करीब 10:13 बजे तक, इसके बाद तृतीया
नक्षत्र: स्वाति — रात करीब 11:52 बजे तक, इसके बाद विशाखा
योग: विष्कुंभ — रात करीब 8:30–8:32 बजे तक
करण: बालव — सुबह करीब 9:48 बजे तक; इसके बाद कौलव — रात करीब 10:13 बजे तक
वार: सोमवार
चंद्र राशि: तुला
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह करीब 6:20 बजे
सूर्यास्त: शाम करीब 5:54 बजे
चंद्रोदय: सुबह करीब 7:45–7:51 बजे
चंद्रास्त: शाम करीब 6:36–6:41 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
अमृत सर्वोत्तम सुबह 6:20 से 7:47 बजे तक
काल हानि सुबह 7:47 से 9:14 बजे तक
शुभ उत्तम सुबह 9:14 से 10:41 बजे तक
रोग अमंगल सुबह 10:41 से दोपहर 12:08 बजे तक
उद्वेग अशुभ दोपहर 12:08 से 1:35 बजे तक
चर सामान्य दोपहर 1:35 से 3:02 बजे तक
लाभ उन्नति दोपहर 3:02 से 4:29 बजे तक
अमृत सर्वोत्तम शाम 4:29 से 5:54 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
चर सामान्य शाम 5:54 से 7:27 बजे तक
रोग अमंगल रात 7:27 से 9:00 बजे तक
काल हानि रात 9:00 से 10:33 बजे तक
लाभ उन्नति रात 10:33 से 12:06 बजे तक
उद्वेग अशुभ रात 12:06 से 1:39 बजे तक
शुभ उत्तम रात 1:39 से 3:12 बजे तक
अमृत सर्वोत्तम रात 3:12 से सुबह 4:45 बजे तक
चर सामान्य सुबह 4:45 से 6:18 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 4:40 से 5:30 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह करीब 11:44 बजे से दोपहर 12:30–12:31 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:07 से 2:49 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:30 से 6:18 बजे तक
राहुकाल: सुबह करीब 7:46 से 9:13 बजे तक
यमगंड: सुबह करीब 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर करीब 1:34 से 3:01 बजे तक
दिशा शूल: पूर्व दिशा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या
चंद्रमा कन्या
मंगल कर्क
बुध तुला
गुरु कर्क
शुक्र तुला
शनि मीन
राहु कुंभ
केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: आज शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। भक्त व्रत, मंत्र जाप, आरती और दुर्गा सप्तशती के पाठ के माध्यम से देवी की उपासना करते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा: मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक चित्रण में उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल रहता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से साधक को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र:
सामान्य मंत्रः ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
बीज मंत्रः ह्रीं श्री अम्बिकायै नमः।
ध्यान मंत्रः दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- मां ब्रह्मचारिणी को पुष्प, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार मिश्री या शक्कर का भोग लगाएं।
- मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- सोमवार होने के कारण भगवान शिव को जल अर्पित कर सकते हैं।
- व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार नियमों का पालन करें।
- दिनभर सात्विक भोजन, संयमित वाणी और सकारात्मक व्यवहार बनाए रखने का प्रयास करें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी उपलब्ध पंचांग स्रोतों और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त के समय में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।
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