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7 सितंबर 2026 सोमवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग

7 सितंबर 2026 (सोमवार) को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी। एकादशी तिथि शाम करीब 5:03 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी।

7 सितंबर 2026 सोमवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग

The Ekadashi Tithi of the month of Bhadrapada (Krishna Paksha) | AI Image

नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना

विक्रम संवत: 2083

मास: भाद्रपद

ऋतु: वर्षा ऋतु

पक्ष: कृष्ण पक्ष

तिथि: एकादशी — शाम 5:03 बजे तक, इसके बाद द्वादशी

नक्षत्र: पुनर्वसु — शाम 6:14 बजे तक, इसके बाद पुष्य

योग: व्यतीपात — सुबह 6:41 बजे तक, इसके बाद वरीयान

करण: बव — सुबह 6:16 बजे तक, इसके बाद बालव; शाम 5:03 बजे के बाद कौलव

वार: सोमवार

चंद्र राशि: मिथुन — दोपहर करीब 12:38 बजे तक, इसके बाद कर्क

सूर्य राशि: सिंह

अयन: दक्षिणायन

सूर्योदय: सुबह 6:02 बजे लगभग

सूर्यास्त: शाम 6:36 बजे लगभग

चंद्रोदय: रात 1:35–2:50 बजे लगभग

चंद्रास्त: शाम 4:01–4:06 बजे लगभग

दिन का चौघड़िया

प्रकृति              फल                                                         समय अवधि

अमृत           अत्यंत शुभ कार्यों के लिए अनुकूल                   प्रातः 06:02 से 07:36 बजे तक
काल            नए शुभ कार्यों से बचें                                    प्रातः 07:36 से 09:10 बजे तक
शुभ             मांगलिक एवं धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल     प्रातः 09:10 से 10:44 बजे तक
रोग             जोखिम एवं विवाद वाले कार्यों से बचें               प्रातः 10:44 से दोपहर 12:19 बजे तक
उद्वेग           महत्वपूर्ण शुभ कार्य टालना बेहतर                  दोपहर 12:19 से 01:53 बजे तक
चर              यात्रा एवं सामान्य कार्यों के लिए अनुकूल          दोपहर 01:53 से 03:27 बजे तक
लाभ            व्यापार एवं आर्थिक कार्यों के लिए शुभ            दोपहर 03:27 से 05:01 बजे तक
अमृत          अत्यंत शुभ कार्यों के लिए अनुकूल                  शाम 05:01 से 06:36 बजे तक

रात का चौघड़िया

प्रकृति                   फल                                                   समय अवधि

चर              यात्रा एवं सामान्य कार्यों के लिए अनुकूल         शाम 06:36 से 08:01 बजे तक
रोग             स्वास्थ्य एवं विवाद संबंधी कार्यों से बचें            रात 08:01 से 09:27 बजे तक
काल           नए शुभ कार्यों से बचें                                   रात 09:27 से 10:53 बजे तक
लाभ           आर्थिक एवं व्यापारिक कार्यों के लिए शुभ        रात 10:53 से 12:19 बजे तक
उद्वेग          महत्वपूर्ण शुभ कार्य टालना बेहतर                  रात 12:19 से 01:45 बजे तक
शुभ           धार्मिक एवं मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल     प्रातः 01:45 से 03:11 बजे तक
अमृत         अत्यंत शुभ कार्यों के लिए अनुकूल                  प्रातः 03:11 से 04:36 बजे तक
चर            यात्रा एवं सामान्य कार्यों के लिए अनुकूल           प्रातः 04:36 से 06:02 बजे तक

शुभ और अशुभ मुहूर्त

ब्रह्ममुहूर्त: सुबह 4:30 बजे से 5:16 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक।

गोधूलि बेला: शाम 6:11/6:36 बजे के आसपास से करीब 6:59 बजे तक।

राहुकाल: सुबह 7:36 बजे से 9:10 बजे तक।

यमगंड: सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक।

गुलिक काल: दोपहर 1:53 बजे से 3:27 बजे तक।

दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:44 बजे से 1:34 बजे तक तथा दोपहर 3:15 बजे से 4:05 बजे तक।

अमृत काल: दोपहर करीब 3:59 बजे से 5:29 बजे तक।

वर्ज्य: सुबह करीब 7:03 बजे से 8:32 बजे तक। 

दिशा शूल: पूर्व दिशा। सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा से बचने की परंपरा मानी जाती है। यदि यात्रा आवश्यक हो तो दर्पण देखकर यात्रा शुरू करना शुभ माना जाता हैं।

ग्रह गोचर स्थिति

ग्रह                    राशि

सूर्य                    सिंह
चंद्रमा                 मिथुन से कर्क
मंगल                 मिथुन
बुध                    सिंह
गुरु                   कर्क
शुक्र                  तुला
शनि                  मीन
राहु                   कुंभ
केतु                  सिंह

विशेष धार्मिक महत्व

7 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत मानाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, जप और ध्यान करने का विशेष महत्व है।

Disclaimer: Prime News इस लेख में दी गई धार्मिक एवं ज्योतिषीय जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह विवरण उपलब्ध पंचांग स्रोतों और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।

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