आज 1कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज सप्तमी तिथि दोपहर करीब 2:51 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ होगी।
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: कार्तिक
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: सप्तमी — दोपहर करीब 2:51 बजे तक, इसके बाद अष्टमी
नक्षत्र: पुष्य — 2 नवंबर की सुबह करीब 4:30 बजे तक, इसके बाद अश्लेषा
योग: साध्य — दोपहर करीब 2:39 बजे तक, इसके बाद शुभ योग
करण: बव — दोपहर करीब 2:51 बजे तक, इसके बाद बालव
वार: रविवार
चंद्र राशि: कर्क
सूर्य राशि: तुला
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह करीब 6:33 बजे
सूर्यास्त: शाम करीब 5:36 बजे
चंद्रोदय: रात करीब 11:40 बजे
चंद्रास्त: दोपहर करीब 12:42 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
उद्वेग — अशुभ — सुबह 6:33 से 7:55 बजे तक
चर — सामान्य — सुबह 7:55 से 9:18 बजे तक
लाभ — उन्नति — सुबह 9:18 से 10:41 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक
काल — हानि — दोपहर 12:04 से 1:27 बजे तक
शुभ — उत्तम — दोपहर 1:27 से 2:50 बजे तक
रोग — अमंगल — दोपहर 2:50 से 4:13 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — शाम 4:13 से 5:36 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
शुभ — उत्तम — शाम 5:36 से 7:14 बजे तक
अमृत — सर्वोत्तम — रात 7:14 से 8:52 बजे तक
चर — सामान्य — रात 8:52 से 10:30 बजे तक
रोग — अमंगल — रात 10:30 बजे से रात 12:08 बजे तक
काल — हानि — रात 12:08 से 1:46 बजे तक
लाभ — उन्नति — रात 1:46 से 3:24 बजे तक
उद्वेग — अशुभ — रात 3:24 से 5:02 बजे तक
शुभ — उत्तम — सुबह 5:02 से 6:33 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 4:50 से 5:41 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह करीब 11:42 से दोपहर 12:26 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 1:55 से 2:39 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:12 से 6:00 बजे तक
राहुकाल: शाम 4:13 से 5:36 बजे तक
यमगंड: दोपहर 12:04 से 1:27 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 2:50 से 4:13 बजे तक
अमृत काल: रात करीब 10:25 से 11:56 बजे तक
रवि पुष्य योग: पुष्य नक्षत्र और रविवार के संयोग से पूरे दिन, सूर्योदय से सूर्यास्त तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: पुष्य नक्षत्र के कारण सूर्योदय से शाम करीब 5:36 बजे तक
दिशा शूल: रविवार को पारंपरिक मान्यता के अनुसार पश्चिम दिशा में दिशा शूल माना जाता है। यात्रा से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह: राशि
सूर्य: तुला
चंद्रमा: कर्क
मंगल: कर्क
बुध: तुला
गुरु: कर्क
शुक्र: तुला
शनि: मीन
राहु: कुंभ
केतु: सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
अहोई अष्टमी
अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और संतान की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। अहोई अष्टमी की पूजा में दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाया जाता है या उनकी तस्वीर स्थापित की जाती है। पूजा के दौरान रोली, चावल, पुष्प, दीपक और मिठाई अर्पित की जाती है। कथा सुनने के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है।
कालाष्टमी
कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रौद्र स्वरूप भगवान कालभैरव की पूजा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। आज दोपहर के बाद अष्टमी तिथि शुरू होने से कालाष्टमी का तिथि संयोग बन रहा है। उदया तिथि के अनुसार कालाष्टमी का व्रत 2 नवंबर को रखा जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान कालभैरव की पूजा करते हैं, भैरव चालीसा का पाठ करते हैं और जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं।
राधा कुंड स्नान
कार्तिक मास में राधा कुंड का विशेष धार्मिक महत्व है। मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में स्थित राधा कुंड को भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीलाओं से जुड़ा पवित्र तीर्थ माना जाता है। कार्तिक मास में श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार राधा कुंड में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर श्रद्धालु राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हैं।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें।
- सूर्य मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
- रवि पुष्य योग में अपनी सामर्थ्य और आवश्यकता के अनुसार शुभ खरीदारी कर सकते हैं।
- भगवान विष्णु की पूजा करें और कार्तिक मास के नियमों का पालन करें।
- शाम को घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाएं।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री दान करें।
- संतान की खुशहाली के लिए अहोई अष्टमी की तैयारी अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
- भगवान कालभैरव का स्मरण करें और सात्त्विक जीवन अपनाने का संकल्प लें।
Disclaimer: PrimeNews इस लेख में दी गई पंचांग संबंधी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह उपलब्ध पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी महत्वपूर्ण पूजा, व्रत या शुभ कार्य से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।
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