आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी। इस दिन शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है और मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाएगी।
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: तृतीया — रात करीब 11:27 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी
नक्षत्र: विशाखा — 14 अक्टूबर की रात करीब 1:43 बजे तक, इसके बाद अनुराधा
योग: प्रीति — रात करीब 8:24 बजे तक, इसके बाद आयुष्मान
करण: तैतिल — सुबह करीब 10:46 बजे तक; इसके बाद गर — रात करीब 11:27 बजे तक
वार: मंगलवार
चंद्र राशि: तुला
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह करीब 6:20 बजे
सूर्यास्त: शाम करीब 5:54 बजे
चंद्रोदय: सुबह करीब 8:46 बजे
चंद्रास्त: शाम करीब 7:14 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
रोग अमंगल सुबह 6:20 से 7:47 बजे तक
उद्वेग अशुभ सुबह 7:47 से 9:13 बजे तक
चर सामान्य सुबह 9:13 से 10:40 बजे तक
लाभ उन्नति सुबह 10:40 से दोपहर 12:07 बजे तक
अमृत सर्वोत्तम दोपहर 12:07 से 1:33 बजे तक
काल हानि दोपहर 1:33 से 3:00 बजे तक
शुभ उत्तम दोपहर 3:00 से 4:27 बजे तक
रोग अमंगल शाम 4:27 से 5:54 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
काल हानि शाम 5:54 से 7:27 बजे तक
लाभ उन्नति रात 7:27 से 9:00 बजे तक
उद्वेग अशुभ रात 9:00 से 10:34 बजे तक
शुभ उत्तम रात 10:34 से 12:07 बजे तक
अमृत सर्वोत्तम रात 12:07 से 1:40 बजे तक
चर सामान्य रात 1:40 से 3:14 बजे तक
रोग अमंगल रात 3:14 से 4:47 बजे तक
काल हानि सुबह 4:47 से 6:20 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 4:41 से 5:31 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:07 से 2:49 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:29 से 6:17 बजे तक
राहुकाल: दोपहर करीब 3:00 से 4:27 बजे तक
यमगंड: सुबह करीब 9:13 से 10:40 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर करीब 12:07 से 1:33 बजे तक
दिशा शूल: उत्तर दिशा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या
चंद्रमा तुला
मंगल कर्क
बुध तुला
गुरु कर्क
शुक्र तुला
शनि मीन
राहु कुंभ
केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन: 13 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को साहस, शौर्य और निर्भयता प्रदान करती हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजा: मां चंद्रघंटा का स्वरूप तेजस्वी और वीरता का प्रतीक माना जाता है। उनका वाहन सिंह है और उनके अनेक हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं। भक्त इस दिन देवी को पुष्प, अक्षत, चंदन, फल और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करते हैं।
मां चंद्रघंटा का मंत्र:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप और पूजा करने से मन में साहस, धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां दुर्गा और मां चंद्रघंटा की पूजा करें।
- मां चंद्रघंटा को पुष्प, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगा सकते हैं।
- मां चंद्रघंटा के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- मां दुर्गा की आरती कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
- व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करें।
- जरूरतमंदों की सहायता करें और दिनभर संयमित वाणी तथा सकारात्मक व्यवहार बनाए रखें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी उपलब्ध पंचांग स्रोतों और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।
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