ओणम का 10 दिवसीय उत्सव राजा महाबली की अपनी प्रजा से वार्षिक मुलाकात की पौराणिक मान्यता से जुड़ा है।
नई दिल्ली (भारत)। केरल का सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख त्योहार ओणम केवल एक दिन नहीं, बल्कि लगभग 10 दिनों तक चलने वाला उत्सव है। यह पर्व खेती, समृद्धि, लोकसंस्कृति और राजा महाबली से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं का प्रतीक माना जाता है। ओणम के दौरान केरल में घरों की सजावट से लेकर पारंपरिक नृत्य, नौका दौड़ और विशेष भोज तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
10 दिनों तक क्यों चलता है ओणम?
ओणम की 10 दिवसीय अवधि का संबंध मलयालम कैलेंडर के चिंगम महीने और उसके दस प्रमुख दिनों से माना जाता है। इन दिनों में घर के आंगन में फूलों से बनाए जाने वाले पूक्कलम का आकार और सजावट धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। ओणम का सबसे महत्वपूर्ण दिन थिरुवोनम होता है। मान्यता है कि इसी दिन प्रजा के प्रिय राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने धरती पर वापस आते हैं। इसलिए लोग अपने घरों को सजाकर उनका स्वागत करते हैं और खुशहाली की कामना करते हैं।
कौन थे राजा महाबली?
पौराणिक कथा के अनुसार महाबली एक शक्तिशाली और दानवीर राजा थे। वे असुर वंश से संबंधित थे, लेकिन अपनी प्रजा के बीच बेहद लोकप्रिय थे। उनके शासन में राज्य में सुख-समृद्धि थी और किसी व्यक्ति के बीच भेदभाव नहीं माना जाता था। महाबली की बढ़ती लोकप्रियता से देवताओं को चिंता होने लगी। इसके बाद भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और महाबली की परीक्षा लेने उनके पास पहुंचे।
भगवान विष्णु ने मांगी तीन पग भूमि
कथा के अनुसार वामन रूप में भगवान विष्णु ने महाबली से केवल तीन पग भूमि दान में मांगी। महाबली ने अपना वचन निभाते हुए दान स्वीकार कर लिया। इसके बाद वामन देव ने विराट रूप धारण किया। पहले पग में उन्होंने पृथ्वी और दूसरे पग में आकाश नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा तो महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान विष्णु ने महाबली की दानशीलता और वचनबद्धता से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि वे वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आ सकेंगे। ओणम को इसी वापसी की खुशी से जोड़ा जाता है।
10 दिनों में क्या-क्या होता है?
ओणम के पहले दिन से ही घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हर दिन फूलों से पूक्कलम बनाया जाता है और त्योहार के मुख्य दिन तक इसकी सजावट और भव्य होती जाती है।
अथम: ओणम की तैयारियों की शुरुआत मानी जाती है। घरों के सामने पहला पूक्कलम बनाया जाता है।
चिथिरा: घर की सफाई और सजावट के साथ पूक्कलम में नए फूल जोड़े जाते हैं।
चोदी: परिवार के लोग खरीदारी शुरू करते हैं और त्योहार की तैयारियां तेज हो जाती हैं।
विशाकम: पारंपरिक पकवानों और ओणम भोज के लिए सामग्री जुटाने का समय माना जाता है।
अंजम: कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक गतिविधियां शुरू हो जाती हैं।
थ्रिकेता: परिवार के लोग उत्सव में शामिल होने के लिए एकत्रित होने लगते हैं।
मूलम: मंदिरों में विशेष पूजा और कई स्थानों पर पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
पूराडम: महाबली और वामन की प्रतीकात्मक मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार कर पूक्कलम में स्थापित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में है।
उथ्राडम: इसे ओणम की पूर्व संध्या के रूप में देखा जाता है। बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है और लोग मुख्य दिन की तैयारी पूरी करते हैं।
थिरुवोनम: यह ओणम का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, पूजा करते हैं, पूक्कलम सजाते हैं और परिवार के साथ ओणसद्य का आनंद लेते हैं।
ओणसद्य क्यों है खास?
ओणम के दौरान परोसा जाने वाला पारंपरिक भोज ओणसद्य केले के पत्ते पर परोसा जाता है। इसमें चावल, सांभर, अवियल, थोरन, ओलन, पचड़ी, खिचड़ी, अचार, पापड़ और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां शामिल हो सकती हैं। व्यंजनों की संख्या और प्रकार क्षेत्र तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
नौका दौड़ और लोक संस्कृति
ओणम के दौरान केरल की प्रसिद्ध वल्लम कली यानी पारंपरिक नौका दौड़ भी आकर्षण का केंद्र होती है। लंबी सर्पाकार नावों में सवार लोग तालमेल के साथ नाव चलाते हैं और प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं।
इसके अलावा कथकली, तिरुवातिरा और अन्य लोककलाओं के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इस तरह ओणम धार्मिक मान्यताओं के साथ केरल की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
ओणम का संदेश
ओणम का सबसे बड़ा संदेश समानता, समृद्धि, भाईचारे और खुशहाली से जुड़ा है। राजा महाबली की प्रजा के प्रति प्रेम की कथा लोगों को ऐसे समाज की कल्पना से जोड़ती है जहां सभी लोग सुखी और समान हों। यही कारण है कि ओणम का उत्सव केवल धार्मिक पर्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार, समाज और संस्कृति को एक साथ जोड़ने वाला 10 दिवसीय उत्सव बन जाता है।
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