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एरिक्सन का 5G ड्रोन सिस्टम, 2027 से ट्रायल

एरिक्सन ने पेश किया 5G आधारित ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, 2027 से शुरू होगा कमर्शियल ट्रायल

एरिक्सन ने सोमवार को एक ऐसा सिस्टम पेश किया है, जो ड्रोन का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए मौजूदा 5G मोबाइल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करता है।

एरिक्सन ने पेश किया 5g आधारित ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम 2027 से शुरू होगा कमर्शियल ट्रायल

Ericsson unveils 5G drone detection system; trials begin in 2027. |

नई दिल्ली: एरिक्सन ने सोमवार को एक ऐसा सिस्टम पेश किया है, जो ड्रोन का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए मौजूदा 5G मोबाइल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करता है। कंपनी की योजना 2027 में इसके कुछ कमर्शियल पायलट शुरू करने और 2028 से बड़े पैमाने पर इसे लागू करने की है। इंटीग्रेटेड सेंसिंग एंड कम्युनिकेशन (ISAC) सिस्टम को डिफेंस, पब्लिक सेफ्टी और क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटरों की मदद के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिए चलती हुई चीजों पर नजर रखी जा सकेगी। इसमें ऐसे ड्रोन भी शामिल हैं, जो मोबाइल नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं।

5G और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगी ड्रोन की पहचान

यह सिस्टम चीजों से रेडियो सिग्नल के रिफ्लेक्ट होने के तरीके का विश्लेषण करके उनका पता लगाता है। इसके लिए 5G रेडियो, एज कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सिग्नल प्रोसेसिंग का इस्तेमाल किया जाता है। यह अलग-अलग एंगल से चीजों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए कई मोबाइल नेटवर्क साइट्स का उपयोग करता है। इससे पोजिशनिंग की सटीकता और कवरेज बेहतर होती है। एरिक्सन के मुताबिक, यह टेक्नोलॉजी शहरों, ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और रणनीतिक स्थानों पर पहले से मौजूद मोबाइल टावर, बैकहॉल और स्पेक्ट्रम जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती है। इससे मिलने वाले डेटा को सिक्योरिटी और कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म सहित अधिकृत बाहरी सिस्टम के साथ स्टैंडर्ड इंटरफेस के जरिए साझा किया जा सकता है। वैलिडेशन टेस्ट के दौरान सिस्टम ने किलोमीटर स्तर की दूरी पर माइक्रो ड्रोन का पता लगाया और उन्हें ट्रैक किया। साथ ही उनकी थ्री-डायमेंशनल पोजिशनिंग भी की। एरिक्सन ने कहा कि सिस्टम का प्रदर्शन ड्रोन के आकार, उसकी उड़ान की स्थिति, इलाके, आसपास के वातावरण और सिस्टम कॉन्फिगरेशन जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

AT&T और अन्य कंपनियों के साथ किए डेमोंस्ट्रेशन

कंपनी ने अलग-अलग बाजारों में टेलीकॉम ऑपरेटरों और टेक्नोलॉजी पार्टनर्स के साथ इस सिस्टम का प्रदर्शन किया है। टेक्सास के आर्लिंगटन में AT&T के साथ हुए ट्रायल में एक साथ कई ड्रोन का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने की क्षमता दिखाई गई। वहीं, हेलसिंकी में एरिलिसवर्कोट के साथ हुए एक अन्य डेमोंस्ट्रेशन में दिखाया गया कि कैसे कई 5G साइट्स पब्लिक सेफ्टी और काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन्स में मदद कर सकती हैं। पोलैंड में एरिक्सन, एसेको और प्ले ने कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन का पता लगाने और उनकी पोजिशनिंग को बेहतर बनाने के लिए एक अकूस्टिक डिटेक्शन सिस्टम के साथ इस टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया।

मौजूदा रडार सिस्टम का विकल्प नहीं, बल्कि बनेगा सहयोगी

इस सिस्टम का उद्देश्य मौजूदा रडार और दूसरे सेंसर को हटाना नहीं, बल्कि उनकी क्षमताओं को और बेहतर बनाना है। एरिक्सन ने कहा कि जैसे-जैसे यह समाधान 6G की दिशा में आगे बढ़ेगा, इसमें इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन की क्षमताएं भी जोड़ी जाएंगी। कंपनी ने इस टेक्नोलॉजी के कई संभावित इस्तेमाल बताए हैं। इनमें बॉर्डर और समुद्री तटों की निगरानी, पोर्ट और पावर प्लांट जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और औद्योगिक गतिविधियों में मदद करना और शहरी इलाकों में ड्रोन ट्रैफिक को मैनेज करना शामिल है। एरिक्सन के मुताबिक, सीमित स्तर पर सिर्फ सेंसिंग से जुड़े कमर्शियल पायलट 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, 2028 से इस सिस्टम को बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है।

(ANI)

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