मध्य प्रदेश के भैंसदेही क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व अशोक सोनारे का 31 अक्टूबर 2026 को नागपुर के निजी अस्पताल में निधन हो गया। रविवार को उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए।
बैतूल: कुछ विदाइयां ऐसी होती हैं, जो केवल आंखों को नम नहीं करतीं, बल्कि समाज की सोच और संवेदनाओं को भी झकझोर देती हैं। एक पिता की अंतिम विदाई में जब उनकी कक्षा आठवीं में पढ़ रही नन्हीं बेटी रिद्धि सोनारे ने बेटे का फर्ज निभाते हुए अपने पिता को कंधा दिया और मुखाग्नि दी तो यह देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य केवल एक परिवार के दुख का नहीं, बल्कि बेटी के असीम प्रेम, साहस और अपने पिता के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक बन गया।
पिता की अर्थी को बेटी ने दिया कंधा
भैंसदेही तहसील के चिर-परिचित व्यक्तित्व स्वर्गीय अशोक सोनारे ने 31 अक्टूबर 2026 को नागपुर के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी से संघर्ष करते हुए अंतिम सांस ली। रविवार को उनके निज निवास से निकली अंतिम यात्रा में सैकड़ों की संख्या में क्षेत्रवासी, परिचित, शुभचिंतक, शिक्षकगण और सामाजिक जन शामिल हुए। पूर्णा घाट मोक्षधाम पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अंतिम विदाई का सबसे मार्मिक पक्ष उनकी बेटी रिद्धि सोनारे का साहस रहा, जिस उम्र में बच्चों के कंधों पर पढ़ाई की जिम्मेदारियां होती हैं उस उम्र में रिद्धि ने अपने जीवन का सबसे कठिन दायित्व निभाया। उसने अपने पिता को कंधा देकर यह संदेश दिया कि बेटी किसी भी मायने में बेटे से कम नहीं होती। पिता की चिता के सामने खड़ी रिद्धि ने मुखाग्नि देकर अपने पिता को अंतिम विदाई दी।
बेटियों के साहस और एकजुटता ने सबको किया भावुक
इस कठिन घड़ी में स्वर्गीय अशोक सोनारे की भतीजियों पूर्वी सोनारे और माही सोनारे ने भी अपनी बहन रिद्धि का पूरा साथ निभाया। दोनों ने अपने चाचा की अंतिम विदाई में सहभागी बनते हुए मुखाग्नि देने में सहयोग किया। परिवार की इन बेटियों ने जिस साहस और एकजुटता का परिचय दिया, उसने वहां उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। स्वर्गीय अशोक सोनारे भैंसदेही क्षेत्र में किसी परिचय के मोहताज नहीं थे। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि उम्र, आर्थिक स्थिति और सामाजिक परिवेश की सीमाएं उनके आत्मीय संबंधों के आड़े नहीं आती थीं। छोटे हों या बड़े, अमीर हों या गरीब, हर वर्ग और हर उम्र के लोगों के बीच उनकी सहज बैठक और आत्मीय संबंध थे। वे हमेशा किसी न किसी रूप में आम लोगों से जुड़े रहते थे।
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