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आणविक स्विच से ALS का खतरा बढ़ा

वैज्ञानिकों ने खोजा 'आणविक स्विच', जो उम्र बढ़ने के साथ बढ़ाता है ALS और हंटिंगटन रोग का खतरा

वैज्ञानिकों ने EPS8 नामक आणविक स्विच खोजा, जो उम्र बढ़ने पर ALS और हंटिंगटन रोग का खतरा बढ़ा सकता है। इसकी गतिविधि घटाने से नुकसान कम हुआ।

वैज्ञानिकों ने खोजा आणविक स्विच जो उम्र बढ़ने के साथ बढ़ाता है als और हंटिंगटन रोग का खतरा

Molecular Switch Raises ALS Risk with Age |

वॉशिंगटन डीसी [अमेरिका]: वैज्ञानिकों ने एक आणविक स्विच की पहचान की है, जो यह समझाने में सहायक हो सकता है कि बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क एएलएस (ALS) और हंटिंगटन रोग जैसी तंत्रिका अपक्षयी (Neurodegenerative) बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों हो जाता है। कृमियों पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि EPS8 नामक प्रोटीन उम्र बढ़ने के साथ शरीर में जमा होने लगता है, जिससे ऐसे सिग्नलिंग मार्ग सक्रिय हो जाते हैं जो विषाक्त प्रोटीन के गुच्छे बनने को बढ़ावा देते हैं। ये हानिकारक समूह न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाते हैं और जीवनकाल को कम कर देते हैं। हालांकि, EPS8 की गतिविधि को कम करने से प्रोटीन का जमाव रुक गया, तंत्रिका कार्य सुरक्षित रहा और स्वस्थ बुढ़ापा बनाए रखने में मदद मिली।

बुढ़ापा और मस्तिष्क रोग का गहरा संबंध

बुढ़ापा तंत्रिका अपक्षयी बीमारियों के लिए सबसे मजबूत ज्ञात जोखिम कारक है, फिर भी शोधकर्ता अभी तक पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए हैं कि उम्र बढ़ने से जुड़े कौन से आणविक परिवर्तन इन स्थितियों के विकास का कारण बनते हैं। वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसे प्रोटीन मार्ग की पहचान की है, जो हंटिंगटन रोग और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) जैसे विकारों में देखे जाने वाले हानिकारक प्रोटीन के जमाव को बुढ़ापे से जोड़ने में सहायक हो सकता है।

कृमियों पर अध्ययन से मिला अहम सुराग

साइंस डेली वेबसाइट के अनुसार, CECAD क्लस्टर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एजिंग रिसर्च में प्रोफेसर डॉ. डेविड विल्चेज़ के नेतृत्व में शोध दल ने छोटे नेमाटोड कृमि Caenorhabditis elegans का उपयोग करके इस संबंध की जांच की। शोधकर्ताओं ने एक ऐसे सिग्नलिंग मार्ग का अध्ययन किया, जो उम्र बढ़ने के साथ अधिक सक्रिय हो जाता है और असामान्य प्रोटीन के संचय में योगदान देता है। उनका अध्ययन, "The Aging Factor EPS8 Induces Disease-Related Protein Aggregation Through RAC Signaling Hyperactivation", जर्नल Nature Aging में प्रकाशित हुआ है।

EPS8 बढ़ाता है विषाक्त प्रोटीन का जमाव

टीम ने उम्र बढ़ने से जुड़े प्रोटीन EPS8 और इसके द्वारा नियंत्रित सिग्नलिंग मार्गों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। पिछले शोध से पता चला था कि कृमियों के बूढ़े होने पर EPS8 जमा होता है और हानिकारक तनाव प्रतिक्रियाओं को सक्रिय करता है, जिससे उनका जीवनकाल कम हो जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि EPS8 का उच्च स्तर और इसके सिग्नलिंग मार्गों में बढ़ी हुई गतिविधि रोग संबंधी प्रोटीन एकत्रीकरण और न्यूरोडीजेनरेशन को बढ़ावा देती है। ये दोनों हंटिंगटन रोग और ALS सहित उम्र से संबंधित न्यूरोडीजेनरेटिव स्थितियों की प्रमुख विशेषताएं हैं। जब वैज्ञानिकों ने EPS8 की गतिविधि को कम किया, तो विषाक्त प्रोटीन के समूह पहले की तरह आसानी से जमा नहीं हुए। इस उपचार से दोनों बीमारियों के कृमि मॉडल में तंत्रिका कोशिकाओं के कार्य को भी संरक्षित रखने में मदद मिली।

शोधकर्ताओं ने क्या कहा?

अध्ययन की पहली लेखिका डॉ. सेडा कोयंकु ने कहा, "हमें एक ऐसे आणविक तंत्र का पता लगाने में खुशी हो रही है, जो यह समझने में सहायक हो सकता है कि उम्र बढ़ने से ALS और हंटिंगटन रोग जैसी बीमारियों में कैसे योगदान होता है। वर्षों से हम जानते हैं कि उम्र इन बीमारियों के लिए प्रमुख जोखिम कारक है, लेकिन उम्र से जुड़े परिवर्तन किस प्रकार इन रोगों को बढ़ावा देते हैं, यह अब तक काफी हद तक अज्ञात था। यह अध्ययन उस पहेली के एक महत्वपूर्ण हिस्से को सुलझाने में मदद कर सकता है।"

मानव कोशिकाओं में भी मिले समान परिणाम

EPS8 और इससे जुड़े सिग्नलिंग अणु विकास की प्रक्रिया में संरक्षित रहे हैं और मानव कोशिकाओं में भी पाए जाते हैं। इससे शोधकर्ताओं को यह जांचने में मदद मिली कि कृमियों में देखी गई प्रक्रिया क्या मानव रोगों में भी लागू होती है। हंटिंगटन रोग और ALS के मानव कोशिका मॉडल में EPS8 के स्तर को कम करने पर वही परिणाम सामने आए, जो C. elegans में देखे गए थे। इस हस्तक्षेप से कोशिकाओं में विषाक्त प्रोटीन के संचय को प्रभावी रूप से रोका जा सका। प्रोफेसर डॉ. डेविड विल्चेज़ ने कहा, "यह बेहद रोमांचक है कि C. elegans में हमने जिन प्रक्रियाओं की पहचान की, वे मानव कोशिका मॉडल में भी संरक्षित हैं। इससे यह साबित होता है कि नेमाटोड कृमि जैसे सरल मॉडल जीवों का उपयोग मनुष्यों से संबंधित जटिल रोग प्रक्रियाओं को समझने में बेहद उपयोगी हो सकता है।"

भविष्य के इलाज की दिशा में नई उम्मीद

वैज्ञानिक अभी भी यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि EPS8 की बढ़ी हुई गतिविधि विषाक्त प्रोटीन को किस तरह एकत्रित करती है। फिर भी, यह अध्ययन उम्र बढ़ने और न्यूरोडीजेनरेशन के बीच एक प्रत्यक्ष आणविक संबंध स्थापित करता है, जिससे इस क्षेत्र के शोध में मौजूद एक बड़ी कमी पूरी होती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि EPS8 और इससे जुड़े सिग्नलिंग पार्टनर भविष्य की नई चिकित्साओं के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य बन सकते हैं। यदि इस मार्ग को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया, तो ALS, हंटिंगटन रोग और उम्र बढ़ने से जुड़े अन्य मस्तिष्क विकारों की प्रगति को धीमा करने या रोकने की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।

(एएनआई)

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