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6 IT कंपनियों पर पड़ा 5400 करोड़ का आर्थिक..

नए श्रम सुधार से देश की शीर्ष-6 IT कंपनियों पर पड़ा 5400 करोड़ का आर्थिक बोझ

Labor Codes : केन्द्र सरकार द्वारा हाल में लागू किये गये नये श्रम सुधारों (Labor Codes) के कारण टेक और आईटी कंपनियों के प्राफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ा है।

नए श्रम सुधार से देश की शीर्ष-6 it कंपनियों पर पड़ा 5400 करोड़ का आर्थिक बोझ

नए श्रम सुधार से देश की शीर्ष-6 IT कंपनियों पर पड़ा 5400 करोड़ का आर्थिक बोझ |

Labor Codes : केन्द्र सरकार द्वारा हाल में लागू किये गये नये श्रम सुधारों (Labor Codes) के कारण टेक और आईटी कंपनियों के प्राफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ा है। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस), टेक महिंद्रा इन्फोसिस, एचसीएल, विप्रो, और एलटीआई माइंडट्री जैसी नामी गिरामी कंपनियां शामिल हैं।

देश में दिसंबर 2025 में लागू हुए नए श्रम सुधारों के चलते आईटी कंपनियों को अतिरिक्त कर्मचारी-संबंधी लागतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके लाभ में कमी आई है। शीर्ष छह आईटी कंपनियों को नए श्रम कानूनों के लागू होने से दिसंबर तिमाही में 5,400 करोड़ का नुकसान हुआ है। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस), टेक महिंद्रा इन्फोसिस, एचसीएल, विप्रो, और एलटीआई माइंडट्री जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। केन्द्र द्वारा लागू इस एकमुश्त शुल्क का तीसरी तिमाही में इनके शुद्ध मुनाफे पर असर दिखा है।

श्रम कानून के नए नियम 29 मौजूदा कानूनों को मिलाकर बनाए गए हैं। इससे कंपनियों को कर्मचारी लाभों की गणना करने के तरीके में संरचनात्मक बदलाव करना पड़ा है। सबसे अधिक 2,128 करोड़ का बोझ टीसीएस पर पड़ा है। इससे शुद्ध लाभ में 13.9 फीसदी गिरावट आई और यह घटकर 10657 करोड़ रह गया। इन्फोसिस को 1289 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इससे फायदा 2.2 फीसदी घट गया। एचसीएल ने 956 करोड़ रुपये का एकमुश्त प्रावधान किया।

इससे लाभ 11.2 फीसदी घट गया। विप्रो को 302 करोड़ का प्रावधान करना पड़ा जिससे मुनाफे पर सात फीसदी का असर दिखा है। टेक महिंद्रा एकमात्र कंपनी है जिसे 272 करोड़ के प्रावधान के बाद भी लाभ हुआ। अतिरिक्त देनदारियों (liabilities) के कारण, इन प्रमुख कंपनियों के मुनाफे में दो अंकों (double-digit) तक की कमी देखी गई है।

 नए नियमों के तहत, कर्मचारी के वेतन का कम से कम 50% हिस्सा 'मूल वेतन' (Basic Salary) होना अनिवार्य है। इसके परिणामस्वरूप ग्रेच्युटी (gratuity) और लीव एनकैशमेंट (leave encashment) के लिए कंपनियों को अब अधिक पैसा अलग रखना पड़ रहा है।

इन श्रम सुधारों का कंपनियों पर भविष्य में निगेटिव असर देखने को मगल सकता है। जेफरीज (Jefferies) के अनुसार, यह केवल एक बार की लागत नहीं है। इस नए श्रम कोड के कारण अगली तिमाहियों में भी कर्मचारी लागत (employee costs) में 5% तक की वृद्धि हो सकती है, जो परिचालन मार्जिन (operating margins) पर दबाव डालेगी।  इन बढ़ी हुई लागत को कम करने के लिए, आईटी कंपनियां सीनियर कर्मचारियों के वेतन वृद्धि (wage hikes) को सीमित कर सकती हैं। 

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