विज्ञापन जगत में अपनी पहचान बनाने वाले शिवजीत कुल्लर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में कदम रख चुके हैं।
नई दिल्ली: विज्ञापन जगत में अपनी पहचान बनाने वाले शिवजीत कुल्लर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में कदम रख चुके हैं। 27 साल की उम्र में चर्चित विज्ञापन स्लोगन लिखने से लेकर अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, शकीरा, स्टिंग, कपिल देव और अजय देवगन जैसे बड़े सितारों के साथ काम करने तक, कुल्लर ने तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में कई यादगार अभियानों को आकार दिया है।
27 की उम्र में बनाई खास पहचान
शिवजीत कुल्लर ने महज 27 साल की उम्र में विज्ञापन जगत की मशहूर पंक्तियों में से एक लिखी थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने लंबे करियर में उन्होंने सैकड़ों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किए और 100 से अधिक सेलिब्रिटी-आधारित विज्ञापन अभियानों पर काम किया। उन्हें भारत के शीर्ष 10 कैंपेन मैगज़ीन क्रिएटिव प्रोफेशनल्स में भी स्थान दिया गया है। ब्रांडिंग, कहानी कहने और सांस्कृतिक रणनीति के क्षेत्र में उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक काम किया है।
बड़े सितारों के साथ किया काम
कुल्लर ने मनोरंजन और खेल जगत की कई बड़ी हस्तियों के साथ काम किया है। उनके साथ काम करने वाले सितारों में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, शकीरा, स्टिंग, कपिल देव और अजय देवगन जैसे नाम शामिल हैं। उन्होंने 100 से अधिक सेलिब्रिटी-आधारित अभियानों के जरिए ब्रांड्स और दर्शकों के बीच जुड़ाव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब AI की दुनिया में नई शुरुआत
विज्ञापन क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने के बाद शिवजीत कुल्लर ने अब AI की दुनिया में कदम रखा है। उन्होंने दो AI कंपनियां FAIME और GoodFox शुरू की हैं। FAIME का उद्देश्य ब्रांड्स को उनके लिए सही सेलिब्रिटी चुनने में मदद करना है। कंपनी सेलिब्रिटी की समझ, ब्रांड के साथ उसकी उपयुक्तता और सांस्कृतिक प्रासंगिकता को ध्यान में रखकर सही साझेदारी तलाशने पर जोर देती है।
सही ब्रांड के लिए सही सेलिब्रिटी
FAIME का विचार इस सोच पर आधारित है कि हर सेलिब्रिटी हर ब्रांड के लिए सही नहीं हो सकता। प्लेटफॉर्म ब्रांड्स को यह समझने में मदद करता है कि किसी खास अभियान के लिए कौन-सा सेलिब्रिटी वास्तव में उपयुक्त रहेगा। इसका मकसद सेलिब्रिटी चयन को केवल उपलब्धता के आधार पर करने के बजाय ब्रांड और दर्शकों के साथ सही तालमेल के आधार पर तय करना है।
GoodFox समझेगा ग्राहकों की सोच
दूसरी कंपनी GoodFox D2C और ई-कॉमर्स ब्रांड्स के लिए तैयार की गई है। यह मनोवैज्ञानिक समझ और AI का इस्तेमाल करके ब्रांड्स को अपने ग्राहकों के व्यवहार और पसंद को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है। प्लेटफॉर्म ग्राहकों की प्रेरणा, प्राथमिकताओं, व्यवहार और खरीदारी की मानसिकता को समझने पर फोकस करता है। इसका उद्देश्य ब्रांड्स को यह जानने में मदद करना है कि ग्राहक ने कोई उत्पाद क्यों खरीदा और भविष्य में वह क्या खरीद सकता है।
60 की उम्र में भी नई चुनौती
60 साल की उम्र में AI कंपनियां शुरू करने को लेकर पूछे जाने पर शिवजीत कुल्लर ने अपने अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब वह युवा थे, तब सिनेमाघरों में ‘चढ़ी जवानी बूढ़े नु’ नाम की फिल्म चल रही थी और शायद उसी ने उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जब लोग आराम करने लगते हैं और जिंदगी की रफ्तार धीमी कर देते हैं, तब भी वह कंपनियां बनाने और अगली बड़ी चीज के बारे में सोचने में लगे रहते हैं। विज्ञापन जगत में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले शिवजीत कुल्लर का AI की ओर यह कदम दिखाता है कि रचनात्मकता और तकनीक का मेल किस तरह नए कारोबारी अवसर पैदा कर सकता है।
(एएनआई)
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