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रोबोटिक्स की दुनिया में AI का नया दौर

AI रोबोट बनाने में डेटा की कमी बनी बड़ी चुनौती, 1 करोड़ घंटे की जरूरत

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच जनरल-पर्पस रोबोटिक्स को व्यावसायिक स्तर पर सफल बनाने की राह में कई चुनौतियां हैं।

ai रोबोट बनाने में डेटा की कमी बनी बड़ी चुनौती 1 करोड़ घंटे की जरूरत

रोबोटिक्स की दुनिया में AI का नया दौर |

नई दिल्ली: गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल-पर्पस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोबोटिक्स को प्रोडक्शन-लेवल की कैपेबिलिटी तक पहुंचने के लिए लगभग 10 मिलियन घंटे के हाई-क्वालिटी फिजिकल इंटरैक्शन डेटा की ज़रूरत हो सकती है, जो कमर्शियल वायबिलिटी हासिल करने में आने वाली चुनौतियों को दिखाता है। भले ही इस सेक्टर में टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस ऑटोनॉमस ड्राइविंग टेक्नोलॉजी की हिस्टोरिकल स्पीड से दो से चार गुना तेज़ होने का अनुमान है। "चाइना AI रोबोटिक्स: फिजिकल AI और एम्बोडाइड रोबोटिक्स में फ्रंटियर फाउंडेशन मॉडल्स पर एक्सपर्ट कॉल" टाइटल वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्रंटियर AI मॉडल्स में एडवांसमेंट इंटेलिजेंट रोबोट्स के डेवलपमेंट को तेज़ कर रहे हैं, लेकिन फिजिकल इंटरैक्शन डेटा, प्रिसिजन और प्रोसेसिंग स्पीड में लिमिटेशन बड़े पैमाने पर कमर्शियलाइजेशन में बड़ी रुकावटें बनी हुई हैं।

फिजिकल इंटरैक्शन होगा बड़ी चुनौती

एक रोबोटिक्स एल्गोरिदम इंजीनियर के साथ 28 अक्टूबर की बातचीत के आधार पर रिपोर्ट ने अनुमान लगाया कि एम्बोडाइड AI को जनरलाइज्ड प्रोडक्शन कैपेबिलिटी हासिल करने के लिए लगभग 10 मिलियन घंटे के हाई-क्वालिटी, मल्टीमॉडल इंटरैक्शन डेटा की ज़रूरत होगी। रिपोर्ट में कहा गया है, एम्बॉडीड AI के लिए लगभग 10 मिलियन घंटे के हाई-क्वालिटी, मल्टी-मोडल इंटरैक्शन डेटा की ज़रूरत होगी, जिसमें पैसिव या शोर वाली रिकॉर्डिंग के बजाय भरोसेमंद फिजिकल इंटरैक्शन डेटा के महत्व पर ज़ोर दिया गया है। इतनी ज़्यादा डेटा ज़रूरत बताती है कि जनरल-पर्पस रोबोट के लिए कमर्शियल वायबिलिटी हासिल करना न केवल AI मॉडल में तरक्की पर निर्भर करेगा, बल्कि इंडस्ट्री की असल दुनिया के फिजिकल इंटरैक्शन के बारे में हाई-क्वालिटी जानकारी इकट्ठा करने की क्षमता पर भी निर्भर करेगा। ऑटोनॉमस गाड़ियों के उलट, जो मुख्य रूप से स्टीयरिंग, एक्सेलरेशन और ब्रेकिंग से चलती हैं। एडवांस्ड रोबोटिक सिस्टम को दर्जनों मैकेनिकल डिग्री ऑफ फ्रीडम, लगातार फिजिकल कॉन्टैक्ट, शियर फोर्स और टैक्टाइल फीडबैक को संभालना होगा। 

फिजिकल AI की रफ्तार ऑटोनॉमस ड्राइविंग से 2-4 गुना तेज होने का अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल-पर्पस रोबोटिक मैनिपुलेशन अभी भी मैच्योरिटी के शुरुआती स्टेज में है, जिसकी तुलना 2015 से पहले या 2017-2018 के आसपास की ऑटोनॉमस ड्राइविंग टेक्नोलॉजी से की जा सकती है, जब इसे सेफ्टी-क्रिटिकल, प्रोडक्शन-ग्रेड रिलायबिलिटी ज़रूरतों के हिसाब से देखा जाता है। हालांकि, इसने अनुमान लगाया कि फिजिकल AI में टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस ऑटोनॉमस ड्राइविंग डेवलपमेंट की पुरानी रफ्तार से दो से चार गुना तेज़ हो सकती है, जिसे फाउंडेशन मॉडल की अनजान माहौल को समझने और बिना ज़्यादा एक्स्ट्रा ट्रेनिंग के नए काम करने की बढ़ती क्षमता से सपोर्ट मिलता है। रिपोर्ट में इंजीनियरिंग की तीन ज़रूरी रुकावटों की पहचान की गई- थ्री-डाइमेंशनल (3D) स्पेशल परसेप्शन, इनफरेंस लेटेंसी और इनफरेंस इकोनॉमिक्स। स्पेशल परसेप्शन पर रिपोर्ट में बताया गया कि मिलीमीटर-लेवल फिजिकल इंटरैक्शन के लिए अभी भी स्पेशल फिडेलिटी काफी नहीं है, जिसके कारण रोबोटिक ऑपरेशन के दौरान बार-बार ट्रायल-एंड-एरर होता है। इसी तरह रियल-टाइम डायनामिक स्टेबिलाइज़ेशन, हाई-स्पीड मैनिपुलेशन और माइक्रोसेकंड-लेवल रिफ्लेक्सिव रिकवरी के लिए अभी की प्रोसेसिंग स्पीड अभी भी काफी नहीं है। 

रोबोटिक्स में AI की सटीकता और विश्वसनीयता बड़ी चुनौती

इंफरेंस इकोनॉमिक्स पर रिपोर्ट में बड़े AI मॉडल्स से एडवांस्ड फिजिकल रीज़निंग और स्पेशल अवेयरनेस क्षमताओं को छोटे, कम्प्यूटेशनली एफिशिएंट मॉडल्स में ट्रांसफर करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है, जो सीधे रोबोटिक हार्डवेयर पर काम कर सकें। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सिक्स-सिग्मा रिलायबिलिटी और माइक्रोसेकंड-लेवल रिपीटेबिलिटी की ज़रूरत होती है, जबकि जनरल-पर्पस AI मॉडल्स कम स्ट्रक्चर्ड एनवायरनमेंट के लिए बेहतर होते हैं, जहां सब-मिलीमीटर प्रिसिजन से ज़्यादा एडैप्टेबिलिटी ज़रूरी होती है। इससे पता चलता है कि सिर्फ AI रीज़निंग में सुधार, फिजिकल प्रिसिजन, रिलायबिलिटी और रियल-टाइम एग्ज़िक्यूशन में इसी तरह की तरक्की के बिना जनरल-पर्पस रोबोटिक्स को कमर्शियली वायबल बनाने के लिए काफी नहीं हो सकता है। रिपोर्ट में मौजूदा डेटा-कलेक्शन तरीकों की सीमाओं पर भी ज़ोर दिया गया है।

एम्बोडेड AI में नए अवसर

इसमें कहा गया है कि फर्स्ट-पर्सन वीडियो रिकॉर्डिंग AI मॉडल्स को टास्क और यूज़र के इरादों को समझने में मदद कर सकती है, लेकिन फिजिकल फोर्स और कॉन्टैक्ट डायनामिक्स के बारे में जानकारी की कमी होती है। इसी तरह फिजिक्स-बेस्ड सिमुलेशन ट्रेनिंग को तेज़ कर सकते हैं, लेकिन रियल-वर्ल्ड फ्रिक्शन, मटीरियल डिफॉर्मेशन और फिजिकल इंटरैक्शन को सही ढंग से रीप्रोड्यूस करने में संघर्ष करते हैं।
रिपोर्ट में हाई-रिज़ॉल्यूशन टैक्टाइल सेंसिंग से सपोर्टेड, डेक्सटेरस यूनिवर्सल मैनिपुलेशन इंटरफ़ेस (UMI) सिस्टम की पहचान की गई, जो हाई-क्वालिटी फिजिकल इंटरैक्शन डेटा इकट्ठा करने का एक अच्छा तरीका है। इसमें सुझाव दिया गया कि डायरेक्ट टच जानकारी को एडवांस्ड सेंसिंग टेक्नोलॉजी के साथ मिलाने से विज़न-बेस्ड सिस्टम की प्रिसिजन लिमिटेशन को दूर करने में मदद मिल सकती है। गोल्डमैन सैक्स ने एडवांस्ड 3D स्पेशल सेंसर, हाई-रिज़ॉल्यूशन टैक्टाइल एरे और फिजिकल डेटा-कलेक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी एम्बोडेड AI की बढ़ती मांग के संभावित निकट-अवधि के बेनिफिशियरी के रूप में पहचाना।

कोलेबोरेटिव रोबोट में बढ़ेंगे कारोबारी अवसर

इंडस्ट्री के कमर्शियल आउटलुक पर रिपोर्ट में "एज और हार्डवेयर इंटीग्रेशन की ओर बढ़ते मोट्स" पर प्रकाश डाला गया, जिसमें सुझाव दिया गया कि रोबोटिक्स मैन्युफैक्चरर हार्डवेयर इंटीग्रेशन, रियल-टाइम मोशन कंट्रोल, कम्प्यूटेशनल एफिशिएंसी और रोबोटिक डिवाइस पर सीधे AI मॉडल डिप्लॉय करने की क्षमता के ज़रिए खुद को तेज़ी से अलग करेंगे। इसमें आगे सुझाव दिया गया कि कोलेबोरेटिव रोबोट और मौजूदा इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन सिस्टम अकेले ह्यूमनॉइड रोबोट की तुलना में ज़्यादा प्रैक्टिकल निकट-अवधि के कमर्शियल मौके दे सकते हैं। खासकर उन मैन्युफैक्चरिंग एनवायरनमेंट में जहां हाई प्रिसिजन और रिलायबिलिटी की ज़रूरत होती है। हालांकि फ्रंटियर AI मॉडल्स से टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट में तेज़ी आने की उम्मीद है। रिपोर्ट में इंडस्ट्री के ट्रैजेक्टरी को "रातों-रात बदलाव के बजाय तेज़ी" बताया गया है, जिससे पता चलता है कि टेक्नोलॉजिकल सुधार जनरल-पर्पस रोबोटिक्स के सामने आने वाली चुनौतियों को तुरंत हल किए बिना कमर्शियल डिप्लॉयमेंट को आगे बढ़ा सकते हैं। 

(इनपुट: ANI)

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