तल्लाहसी, 27 जनवरी। समुद्र में बड़ी संख्या में सीपियां देखने के बाद भी कई बार आप उन्हें हल्के में ले सकते हैं।
ये समुद्री कंकाल क्या कहानियां सुनाते हैं?
समुद्र में बड़ी संख्या में सीपियां देखने के बाद भी कई बार आप उन्हें हल्के में ले सकते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का अनुमान है कि कैलिफोर्निया की खाड़ी के किनारे बीच के सिर्फ एक छोटे से हिस्से में कम से कम 2 हजार अरब सीपियां मौजूद हैं। सोचिए, अगर आज पृथ्वी पर मौजूद हर व्यक्ति सीप इकट्ठा करने जाए, तो उनमें से हर कोई लगभग 1,000 सीपियां ले पाएगा। हम जीवाश्म विज्ञानी और समुद्र पारिस्थितिकी विज्ञानी हैं। हमारे वैज्ञानिक अनुसंधान में सीपियों को देखना और यह पता लगाना शामिल है कि वे कहां से आई हैं और कितनी पुरानी हैं।
बीच पर बिखरे कंकाल
सीप बस जीवों के कंकाल ही हैं। लेकिन इंसानों और अधिकतर दूसरे पशुओं से अलग, घोंघों, क्लैम, ऑयस्टर और मसल्स में एक्सोस्केलेटन होता है, यानी उनका कंकाल उनके शरीर के बाहर होता है। जब हम सीपियों की बात करते हैं, तो आमतौर पर इसका मतलब घोंघों जैसे जीवों के बाहरी खोल यानी शेल से होता है। कई दूसरे समुद्री जीव भी कंकाल बनाते हैं, जैसे सैंड डॉलर जैसे इकाइनोइड्स, जिनके अंदरूनी कंकाल होते हैं।
समुद्री जीव खुद बनाते हैं अपना कवच
ये समुद्री जीव अपने नरम शरीर को शिकारियों, पर्यावरणीय बदलावों और खतरों से बचाने के लिए अपने शेल खुद बनाते हैं। शेल उन्हें समुद्र तल पर स्थिर रहने, बड़े होने और बेहतर तरीके से घूमने में भी मदद करते हैं। इस बाहरी आवरण को बनाने की प्रक्रिया को ‘बायोमिनरलाइजेशन’ कहा जाता है।
किस चीज से बनती हैं सीपियां?
अधिकतर समुद्री जीव अपने शेल कैल्शियम कार्बोनेट से बनाते हैं, जो एक मजबूत खनिज है और लाइमस्टोन में भी पाया जाता है। कुछ स्पंज और सूक्ष्मजीव सिलिका का इस्तेमाल करते हैं। वहीं एक ऐसा समूह भी है जो कैल्शियम फॉस्फेट से शेल बनाता है — वही पदार्थ जिससे इंसानों की हड्डियां बनती हैं। पृथ्वी पर आज मौजूद 50,000 से अधिक प्रजातियां अलग-अलग तरह के शेल बनाती हैं। यही वजह है कि बीच पर मिलने वाली सीपियों के आकार, रंग और बनावट में इतनी विविधता होती है।
समय के साथ जीवाश्म में बदलती सीपियां
हड्डियों की तरह ही, सीपियां भी बहुत लंबे समय तक टिक सकती हैं। मृत जीवों की सीपियां समुद्री लहरों के साथ इधर-उधर बहती रहती हैं और कई बार किनारे तक पहुंच जाती हैं। कुछ सीपियां समुद्र तल के नीचे दब जाती हैं। दबाव और समय के साथ-साथ ये जीवाश्म में बदल जाती हैं।
सीपियां हमें क्या सिखाती हैं?
सीपियों के इतने अधिक होने का एक बड़ा कारण यह है कि वे हजारों साल तक सुरक्षित रह सकती हैं। अपने शोध में हम कार्बन डेटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके यह पता लगाते हैं कि कोई सीप कितनी पुरानी है। पुराने शेल में रेडियोकार्बन की मात्रा कम होती है, जिससे वैज्ञानिक उनकी उम्र का अनुमान लगा लेते हैं। इस प्रक्रिया में हमने पाया कि समुद्र में मौजूद कई सीप सैकड़ों से हजारों साल पुरानी हैं।
सीपियां: समुद्र की टाइम मशीन
सीपियां सिर्फ सुंदर ही नहीं, बल्कि बेहद उपयोगी भी हैं। छोटी-छोटी टाइम मशीन की तरह ये अपने अंदर बीते दौर की कहानियां समेटे होती हैं। सीप की रासायनिक संरचना का अध्ययन करके वैज्ञानिक पुराने मौसम, समुद्री वातावरण और तापमान के बारे में जान सकते हैं। कई बार यह भी पता चल जाता है कि जिस जीव की यह सीप थी, उसकी मौत कैसे हुई और उसे जीवन में किन खतरों का सामना करना पड़ा।
यह भी पढ़े: ट्राई का फरमान: बैंक-एनबीएफसी में चिंता बढ़ी
https://www.primenewsnetwork.in/india/trai-order-sparks-concern-for-banks-nbfcs/130726