क्या आपको पता है कि इस धरती पर एक ऐसा जीव भी है, जिसका DNA इंसानों से लगभग 98 से 99 प्रतिशत तक मिलता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं चिम्पांज़ी की।
World Chimpanzee Day 2026: क्या आपको पता है... कि इस धरती पर एक ऐसा जीव भी है, जिसका DNA इंसानों से लगभग 98 से 99 प्रतिशत तक मिलता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं चिम्पांज़ी की। आज, 14 जुलाई को पूरी दुनिया World Chimpanzee Day मना रही है।
इंसानों के सबसे करीबी रिश्तेदार
लेकिन सवाल है... अगर चिम्पांज़ी हमसे इतने मिलते-जुलते हैं, तो फिर हम अलग कैसे हैं? दरअसल, वैज्ञानिकों के मुताबिक इंसान और चिम्पांज़ी का DNA लगभग 98.8 प्रतिशत तक समान है। यही वजह है कि उन्हें इंसानों का सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार माना जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि चिम्पांज़ी भी हमारी तरह औजार बनाना और उनका इस्तेमाल करना जानते हैं, अपने परिवार और दोस्तों से गहरा रिश्ता निभाते हैं, भावनाएं व्यक्त करते हैं और समूह में रहना पसंद करते हैं।
14 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है World Chimpanzee Day?
14 जुलाई को World Chimpanzee Day इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन, साल 1960 में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. जेन गुडॉल ने तंजानिया के गोम्बे स्ट्रीम नेशनल पार्क में चिम्पांज़ियों पर अपना ऐतिहासिक शोध शुरू किया था। उनके शोध ने दुनिया को बताया कि सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि चिम्पांज़ी भी सोचते हैं, सीखते हैं और औजारों का इस्तेमाल करते हैं।
कहां पाए जाते हैं चिम्पांज़ी?
चिम्पांज़ी मुख्य रूप से पश्चिमी और मध्य अफ्रीका के घने जंगलों और सवाना क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये पेड़ों पर अपना घोंसला बनाते हैं और फल, पत्तियां व कीड़े-मकोड़े खाकर जीवन बिताते हैं। भारत की बात करें, तो चिम्पांज़ी यहां के मूल निवासी नहीं हैं। वे केवल कुछ चुनिंदा चिड़ियाघरों में ही देखने को मिलते हैं। भारत की सबसे प्रसिद्ध चिम्पांज़ी 'रीता' थी, जिसे 1964 में दिल्ली चिड़ियाघर लाया गया था और उसने लगभग 59 साल तक वहां जीवन बिताया।
विलुप्त होने का बढ़ता खतरा
लेकिन दुख की बात यह है कि आज चिम्पांज़ी गंभीर खतरे में हैं। वनों की कटाई, अवैध शिकार और बीमारियों के कारण उनकी संख्या लगातार घट रही है। अगर समय रहते उन्हें नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियां शायद उन्हें सिर्फ किताबों और तस्वीरों में ही देख पाएंगी। तो इस World Chimpanzee Day पर आइए, सिर्फ इस अनोखे जीव के बारे में जानें ही नहीं, बल्कि उसके संरक्षण का संदेश भी फैलाएं। क्योंकि प्रकृति सुरक्षित होगी, तभी हमारा भविष्य भी सुरक्षित होगा।
यह भी पढ़े: 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य के लिए परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनेगा भारत: संसदीय समिति अध्यक्ष