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एफडीआई में 18% की तेजी

वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 18 फीसदी उछाल

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उथल पुथल के बावजूद चालू वित्त वर्ष के नौ महीनों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 18% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 18 फीसदी उछाल

Foreign Direct Investment |

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उथल पुथल के बावजूद चालू वित्त वर्ष के नौ महीनों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 18% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इस दौरान अमेरिका से होने वाला निवेश लगभग दोगुना होकर 7.80 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में चुनौतियों और कई देशों में तनाव के बीच विदेशी निवेशकों का भारत को लेकर भरोसा कामय है। यही कारण है कि वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में देश में 18 फीसदी अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया। एफडीआई प्रवाह का यह आंकड़ा बताता है कि सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर, 2025 में देश में 47.87 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी आया, जो सालाना आधार पर 18 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2024-25 की समान अवधि में देश में 40.67 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। 2025-26 के पहले नौ महीनों में देश कुल 73.31 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेश आया, जिसमें पुनर्निवेश आय भी शामिल है।

एफडीआई: क्षेत्र और स्रोत विश्लेषण

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका से होने वाला निवेश लगभग दोगुना होकर 7.80 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। सेक्टर के लिहाज से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में सबसे ज्यादा 10.7 अरब डॉलर का निवेश आया है। इसके बाद सर्विसेज में 8.42 अरब डॉलर, ट्रेडिंग में 3.36 अरब डॉलर, रिन्युएबल एनर्जी में 2.53 अरब डॉलर, कंस्ट्रक्शन में 2.10 अरब डॉलर, ऑटोमोबाइल में 1.82 अरब डॉलर और केमिकल्स में सबसे कम 0.70 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया। कुल एफडीआई, जिसमें इक्विटी इनफ्लो और पुनर्निवेशित कमाई शामिल है, 17.4% बढ़कर 73.31 अरब डॉलर दर्ज की गई। हालांकि, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इक्विटी इनफ्लो 23% कम रहा।भारत में एफडीआई का सबसे बड़ा स्रोत 17.65 अरब डॉलर के साथ सिंगापुर रहा। दूसरे स्थान पर अमेरिका है, जहां से निवेश एक साल पहले के 3.73 अरब डॉलर से दोगुना बढ़ा है। राज्यवार निवेश के मामले मे महाराष्ट्र 15.4 अरब डॉलर के साथ विदेशी पूंजी आकर्षित करने में शीर्ष पर रहा। कर्नाटक 11.2 अरब डॉलर के साथ दूसरे और गुजरात 5 अरब डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर है।

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