वर्ष 2002 की 9 सितंबर की वह काली रात रफीगंज कभी नहीं भूल सकता। जब तेज रफ्तार में आ रही राजधानी एक्सप्रेस धावा नदी के पुल पर बिखर गई थी।
24 years later, candles lit in memory of 133 victims of the Dhawa Bridge tragedy |
औरंगाबाद {बिहार}: वर्ष 2002 की 9 सितंबर की वह काली रात रफीगंज कभी नहीं भूल सकता। जब तेज रफ्तार में आ रही राजधानी एक्सप्रेस धावा नदी के पुल पर बिखर गई थी। उसी दर्दनाक हादसे की 24वीं बरसी पर बुधवार की रात्रि में रफीगंज के धावा नदी रेल पुल पर रेलकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने पटरी की पूजा कर मृतकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
हादसे की बरसी पर पटरी की पूजा
रात के ठीक 10 बजकर 40 मिनट से पूर्व राजधानी एक्सप्रेस के गुजरने से पहले अधिकारी और कर्मचारी धावा पुल संख्या 445 पर एकत्र हुए। सबसे पहले पूरे विधि-विधान से रेल की पटरी की पूजा की गई। पटरी पर हल्दी, सिंदूर, चंदन लगाकर फूल-माला चढ़ाई गई, धूप-अगरबत्ती जलाई गई और आरती की गई। पूजा के बाद रेलकर्मियों ने भविष्य में ऐसी किसी भी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न होने की कामना की।
133 कैंडल और 2 मिनट का मौन
इसके बाद 133 कैंडल और दीये जलाकर मृत यात्रियों की आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया। पुल पर छाई खामोशी और टिमटिमाते दीयों का मंजर हर किसी को भावुक कर रहा था। रेल अधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि आज से ठीक 24 साल पहले 2002 में आज ही की रात 10 बजकर 40 मिनट पर 12301 अप हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस हादसे का शिकार हुई थी। हावड़ा से नई दिल्ली जा रही इस वीआईपी ट्रेन के 14 डिब्बे धावा नदी में गिर गए थे। हादसे में 133 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 150 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उस रात स्थानीय ग्रामीणों ने देवदूत बनकर कई लोगों की जान बचाई थी।
हादसे ने रेलवे को दिए कई सबक
उन्होंने कहा कि इस हादसे ने रेलवे को कई सबक दिए। तब से हर साल 9 सितंबर को हम सभी यहां आकर पटरी की पूजा करते हैं। यह पूजा सुरक्षा, सतर्कता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। समाजसेवी तुलसी यादव, विनोद कुमार और शुभम सिंह ने कहा कि हम हर साल मृतकों को याद करने आते हैं। पटरी की पूजा कर हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि अब कभी किसी यात्री के साथ ऐसा न हो। यह सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक संकल्प है। इस अवसर पर दिलीप कुमार, सत्य प्रकाश आजाद, मनोज मधुकर, विराट कश्यप, जितेंद्र गोस्वामी, अजय कुमार, रामा शंकर सहित बड़ी संख्या में आरपीएफ जवान, रेलकर्मी और स्थानीय नागरिक मौजूद थे।
यह भी पढ़: वायरल वीडियो के बाद पुलिस का एक्शन, कठेरिया परिवार पर हमले में आठ नामजदों पर मुकदमा